करोड़ों का खर्च, फिर भी प्यासे बच्चे
- नारायणगंज में शो-पीस बनीं स्कूलों और आंगनवाडिय़ों की पानी टंकियां
- जल जीवन मिशन में लीपापोती
- कागजों पर दौड़ रही योजना
- जमीनी हकीकत में न रखरखाव का पता न बजट का लेखा-जोखा
मंडला महावीर न्यूज 29. मप्र शासन की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत हर स्कूल और आंगनवाड़ी तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के दावे नारायणगंज विकासखंड के बबलिया क्षेत्र में खोखले साबित हो रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी शासकीय भवनों में नल-जल योजना केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गई है।
बताया गया कि नारायणगंज ब्लाक के स्कूलों और आंगनवाडिय़ों में पानी की टंकियां तो रख दी गई हैं, लेकिन उनका संचालन और रखरखाव कौन करेगा, इसकी जानकारी न तो शिक्षकों को है और न ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को। आरोप है कि बिना कार्य पूर्णता और उपयोगिता प्रमाण पत्र के ही नारायणगंज जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से फाइलों को ओके कर दिया गया, जबकि धरातल पर योजना ठप पड़ी है।
शो-पीस बनकर रह गई योजना
प्राथमिक शाला जराहडीह के शिक्षक राजाराम ने बताया कि उनके यहाँ पानी की टंकी हवा में उड़ गई है और योजना बंद है। इसी प्रकार प्राथमिक शाला केवलारी, कापा टोला, एकीकृत हाईस्कूल मल्ठार, बंजर टोला, कॉलोनी टोला और शाला खिन्हा के शिक्षक कौशल किशोर रिजोरिया, सुफाल सिंह मरावी, शिवराज सिंह सैयाम और अन्य ने एक सुर में कहा कि बोर और टंकी तो लगा दिए गए, लेकिन इनका संचालन अधिकार और बजट किसी को नहीं पता। आंगनवाड़ी केंद्र भिलवाटोला की स्थिति भी ऐसी ही है।
अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी पर सवाल
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से शासन की योजनाओं को चूना लगाया जा रहा है। कई स्थानों पर काम अधूरा छोड़ दिया गया है, तो कहीं घटिया निर्माण के कारण उपकरण खराब हो रहे हैं। स्कूलों में पेयजल की अव्यवस्था बनी हुई है और बच्चे आज भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
विधिवत जांच की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषियों को दंडित कर हर शासकीय भवन तक सुचारु पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो शासन की करोड़ों की यह योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी।
इनका कहना है
जल जीवन मिशन के तहत चार आंगनबाडिय़ों में बिजली मीटर लगा दिए गए हैं, जिनका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इसके बावजूद, नैझर, पौड़ी, पंडरी तलाई और चिमका टोला की आंगनबाडिय़ों में 13 से 14 हजार रुपये तक का बिल आ गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि नल-जल योजना और पानी टंकी बंद होने के बाद भी इतना भारी बिल आ रहा है, जिसे भरने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं है।
राम चरण मसराम, सरपंच, नैझर











