पारंपरिक खान-पान को सहेजने की अनूठी पहल
मंगलगंज की महिलाओं ने कोदो भात और महुआ लड्डू से जीता नगरवासियों का दिल
- मंडला मिलेट फेस्टिवल में ट्राइबल फूड का जलवा
- महिलाओं ने पेश की आदिवासी जायके की विरासत
मंडला महावीर न्यूज 29. मोटे अनाज (मिलेट्स) की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय मंडला मिलेट फूड फेस्टिवल में आदिवासी परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। स्थानीय पुलिस ग्राउंड में आयोजित इस महोत्सव में नगरवासी सपरिवार पहुँचकर न केवल श्री अन्न के गुणों को जान रहे हैं, बल्कि सदियों पुरानी आदिवासी पाक कला का आनंद भी ले रहे हैं।
बताया गया कि महोत्सव में आकर्षण का केंद्र नारायणगंज की महिलाओं द्वारा लगाया गया निवि ट्राइबल फूड स्टाल रहा। आदिवासी परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखने के उद्देश्य से लगाए गए इस स्टाल पर शुद्ध पारंपरिक पद्धतियों से तैयार व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। संगठन की महिलाओं ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पोषक खान-पान से जोडऩा है।

मंगलगंज की मातृशक्ति ने परोसा स्वाद का खजाना
नारायणगंज विकासखंड के ग्राम मंगलगंज से आईं अनुभवी महिलाओं की टीम ने अपने हाथों के हुनर से स्टाल पर जायके का जादू बिखेरा। इस टीम में वंदना मरावी तेकाम, हीरामणि उईके, शशिकांति वरकड़े, नेमवती मरावी, फगुनिया उईके, रेवती तेकाम, कलिया आर्मो, द्रोपति उईके और भुवन मरावी शामिल रहीं। इन महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और आत्मीयता के साथ अतिथियों का स्वागत किया।

स्टाल पर उपलब्ध प्रमुख आदिवासी व्यंजन
वंदना मरावी तेकाम ने बताई की मिलेट फूड फेस्टिवल में पेश किए गए आदिवासी भोजन की सूची लंबी और सेहत से भरपूर रही, जिसमें कुछ विशेष व्यंजन शामिल थे। मुख्य व्यंजन में कोदो भात, मक्के का पेज, मक्के की पूड़ी, चीला और गक्कड़-भरता। विशिष्ट भाजियोंं में राई की भाजी और चने की भाजी। मिठाई एवं स्नैक्स में कुटकी की खीर (भगर), औषधीय गुणों से भरपूर महुआ के लड्डू, अलसी के लड्डू, लाटा और मलीदा। इसके साथ ही चटनी के साथ अन्य व्यंजनों में अलसी की चटनी, मीठी नीम पत्ती की चटनी, उड़द की दाल और ताजा मही स्टॉल में रखे गए।

सेहत और संस्कृति का दिया संदेश
मिलेट फूड फेस्टिवल में आदिवासी परंपरा और स्वाद के साथ अन्य व्यंजनों का जलवा भी रहा। जिले के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी नारायणगंज मंगलगंज की इन महिलाओं द्वारा तैयार किये गए व्यंजनों की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल स्थानीय आदिवासी उत्पादों को बाजार दिलाते हैं, बल्कि कुपोषण जैसी समस्याओं से लडऩे के लिए श्री अन्न को प्रोत्साहित भी करते हैं। शनिवार को मेले के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में नगरवासी पहुंचे।












