डिंडोरी जल अभावग्रस्त जिला घोषित
10 फरवरी से जल दोहन पर कड़ा प्रतिबंध
- समृद्ध जल संसाधनों के बीच प्यासा आदिवासी समाज
- गिरता भूजल स्तर बना भविष्य की बड़ी आपदा
डिंडोरी/मंडला महावीर न्यूज 29| डिंडोरी जिले में गहराते जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने इसे ‘जल अभावग्रस्त जिला’ घोषित कर दिया है। आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की संभावित कमी को देखते हुए जल संसाधनों के उपयोग पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए हैं। यह आदेश 10 फरवरी से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसके तहत निजी नलकूप खनन और बोरवेल ड्रिलिंग पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
नीतिगत उपेक्षा का शिकार आदिवासी अंचल
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा के अनुसार, मध्यप्रदेश का आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहजीवन में रहा है, लेकिन आज वही समुदाय पानी की गंभीर असुरक्षा का सामना कर रहा है। झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भौगोलिक परिस्थितियों और पथरीले भूभाग के कारण जल संचयन चुनौतीपूर्ण है। विडंबना यह है कि बांधों और औद्योगिक परियोजनाओं ने आदिवासियों को उनके पारंपरिक जल स्रोतों से अलग कर दिया है।
जल संकट के मुख्य कारण और चिंताएं
- भूजल का अत्यधिक दोहन: मध्यप्रदेश में लगभग 60% भूजल का दोहन हो चुका है। कुल उपयोग का 90% कृषि और मात्र 9% घरेलू कार्यों में खर्च हो रहा है।
- पारंपरिक ज्ञान की अनदेखी: झिरिया, डबरा और पहाड़ी बांधों जैसे आदिवासी समाज के पारंपरिक जल संरक्षण ज्ञान को आधुनिक नीतियों में नजरअंदाज किया गया है।
- प्रदूषित जल: कई क्षेत्रों में भूजल में फ्लोराइड और आयरन की अधिकता से दंत व हड्डियों की बीमारियां बढ़ रही हैं।
समाधान: सामुदायिक भागीदारी और ग्रामसभा
लेख में जोर दिया गया है कि “हर घर जल” का सपना तब तक अधूरा है जब तक आदिवासी समाज को जल प्रबंधन का केंद्र नहीं बनाया जाता। विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन के तहत ग्रामसभा आधारित योजनाएं, वर्षाजल संचयन और जल समितियों में महिलाओं की निर्णायक भूमिका ही इस संकट का स्थायी समाधान है।
प्रशासनिक अनुशासन की जरूरत
डिंडोरी में जल संकट अब केवल संभावना नहीं बल्कि ‘वर्तमान स्थिति’ बन चुका है। प्रशासन द्वारा पानी को कानून और अनुशासन के दायरे में लाने की यह कोशिश यदि सफल रही, तो यह जल संरक्षण का एक उदाहरण बन सकता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी महीनों में पेयजल आपातकाल की स्थिति निर्मित हो सकती है।









