खरगोन के 8 जोड़ों ने शुरू की 5100 किमी की नर्मदा व तीर्थ परिक्रमा
आस्था का महासफर, मोटरसाइकिल से निकले आठ जोड़े
- माई की भक्ति में रंगे परिक्रमावासी
- 61 वर्षीय देवर अपनी 60 वर्षीय भाभी माँ को करा रहे परिक्रमा
- 3500 किमी नर्मदा पथ और 1600 किमी अन्य तीर्थों का संगम
- माहिष्मती नगरी मंडला पहुँचे परिक्रमावासी
मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा मैया के प्रति अटूट श्रद्धा और धार्मिक संकल्प की एक अनूठी तस्वीर मंडला जिले में देखने को मिली, जब खरगोन जिले के ग्राम पालसुद और बेलम से आठ जोड़े माँ नर्मदा की परिक्रमा और विभिन्न शक्तिपीठों व ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए निकले हैं। कुल 5100 किलोमीटर की इस लंबी यात्रा में माई की भक्ति और सेवा का जज्बा इन 16 परिक्रमावासियों में देखते ही बन रहा है।
नर्मदा परिक्रमावासी पवन सिंह पटेल ने बताया कि माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ 18 जनवरी को भगवान शिव की नगरी ओंकारेश्वर से किया था। परिक्रमावासियों ने बताया कि माँ नर्मदा की पारंपरिक 3500 किलोमीटर की परिक्रमा के साथ उन्होंने 1600 किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा का भी संकल्प लिया है। इस अतिरिक्त मार्ग में उन्होंने गुजरात के धार्मिक स्थल, द्वारका, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, चोटीला मंदिर और डाकोर जैसे अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। ओंकारेश्वर से शुरू होकर गुजरात का भ्रमण करते हुए यह जत्था अब वापस नर्मदा के किनारे-किनारे मंडला जिला पहुंचा है।
भाभी माँ को करा रहे परिक्रमा
इस जत्थे में सबसे खास आकर्षण खरगोन जिले के ग्राम बेलम का वह जोड़ा है, जहाँ 61 वर्षीय नरसिंह राजपूत अपनी 60 वर्षीय भाभी माँ कमल बाई राजपूत को मोटरसाइकिल पर बैठाकर परिक्रमा करा रहे हैं। नरसिंह राजपूत का कहना है कि भाभी माँ उनके लिए माता समान हैं और उनके साथ इस पावन यात्रा पर निकलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह जोड़ा पूरे जत्थे में उम्र में सबसे ज्येष्ठ है और अन्य श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
समय का अभाव, पर भक्ति अटूट
परिक्रमावासी सोहन सिंह पटेल ने बताया कि पैदल परिक्रमा करने की इच्छा तो मन में थी, लेकिन समय और पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण वह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में माई नर्मदा की ऐसी कृपा हुई कि गाँव के ही आठ परिवारों ने एक साथ मोटरसाइकिल से निकलने का निर्णय लिया। मोटरसाइकिल से यात्रा करने के कारण वे न केवल नर्मदा पथ, बल्कि अन्य प्रमुख तीर्थों का भी दर्शन करने में सफल हो रहे हैं।
सूर्यकुण्ड धाम में किया हनुमान जी के दर्शन
अपनी यात्रा के अगले पड़ाव में यह जत्था माहिष्मती नगरी मंडला पहुँचा। यहाँ श्रद्धालुओं ने जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सूर्यकुण्ड धाम में हनुमान जी के दर्शन किए। परिक्रमावासियों ने यहाँ स्थापित दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष मत्था टेका। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहाँ स्थित हनुमान जी की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है, जिसकी महिमा सुनकर परिक्रमावासी अभिभूत हो गए।
जत्थे में शामिल 16 परिक्रमावासी
माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं में ग्राम पालसुद से सोहन सिंह पटेल 52 वर्ष पत्नि निर्मला बाई 50 वर्ष, पवन सिंह पटेल 55 वर्ष पत्नि राधा बाई 52 वर्ष, महेन्द्र सिंह राठौर 50 वर्ष पत्नि मंजू बाई राठौर 48 वर्ष, नहर सिंह 50 वर्ष पत्नि कविता बाई 46 वर्ष, मदन लाल मालाकार 57 वर्ष पत्नि बसंती बाई 55 वर्ष, देवी सिंह राठौर 53 वर्ष पत्नि उमा बाई राठौर 50 वर्ष, कड़वा जी 58 वर्ष पत्नि सलिता बाई 55 वर्ष है, वहीं ग्राम बेलम से नरसिंह राजपूत 61 वर्ष अपनी भाभी माँ कमलबाई 60 वर्ष के साथ माँ नर्मदा की परिक्रमा के लिए निकले है। यह जत्था अब मंडला से अपनी वापसी यात्रा शुरू कर रहा है, जो पुन: ओंकारेश्वर पहुँचकर संपन्न होगी। परिक्रमावासियों का मानना है कि यह यात्रा केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि माई की सेवा और आत्मिक शांति का मार्ग है।










