सिद्धेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, गणेश पुराण में गूंजी गणेश विवाह और शौर्य गाथा
- चौथ का चांद देखने से क्यों लगता है कलंक, पंडित ललित नारायण ने विस्तार से बताया पौराणिक रहस्य
मंडला महावीर न्यूज 29. सुरंगदेवरी स्थित सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र श्री सिद्धेश्वर धाम में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। नौ दिवसीय श्री गणेश पुराण कथा के छठवें दिन भगवान श्री गणेश के दिव्य चरित्र का वर्णन सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा वाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान गणेश के विवाह और वीरता के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
कथा के दौरान पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि किस प्रकार भगवान गणेश का विवाह प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों ऋद्धि और सिद्धि के साथ संपन्न हुआ। श्री गणेश जी ने अपनी बुद्धिमत्ता से माता-पिता की परिक्रमा कर ब्रह्मांड विजय प्राप्त की थी, जिससे प्रसन्न होकर उनका विवाह हुआ। उनके दो पुत्र शुभ और लाभ हुए।
इस प्रसंग के दौरान कथा का पंडाल गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा के दौरान भगवान श्री गणेश की बारात बैंड बाजे के साथ निकाली गई। नाचते, गाते भक्तों ने बारात में शामिल होकर भगवान श्री गणेश की बारात कथा पंडाल पहुंची। जहां उपस्थित भक्तों ने बारात की आगवानी की और फूलों की वर्षा कर भगवान गणेश की शादी का जश्र मनाया गया।
क्यों वर्जित है चौथ का चांद देखना
छठवें दिन की कथा में पंडित ललित नारायण मिश्रा ने चौथ का चांद देखना क्यो वर्जित है इसका विस्तार से वर्णन किया। इस कथा का मुख्य केंद्र कलंक चतुर्थी का प्रसंग रहा। पंडित ललित नारायण मिश्रा ने विस्तार से समझाया कि आखिर गणेश चतुर्थी चौथ का चांद देखना अशुभ क्यों माना जाता है। उन्होंने कहां कि पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान गणेश को गजानन रूप प्राप्त हुआ, तो अपने सुंदर रूप पर गर्व करने वाले चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप को देखकर उपहास किया। चंद्रमा के इस अहंकार और अपमान को देखकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया कि जो भी व्यक्ति चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखेगा, उस पर समाज में झूठा कलंक लगेगा। कथा वाचक ने आगे बताया कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी अनजाने में चौथ का चांद देख लिया था, जिसके कारण उन पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था। यही कारण है कि आज भी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं।
चार साहिबजादों को किया नमन
धार्मिक प्रसंगों के साथ-साथ पंडित ललित नारायण मिश्रा ने राष्ट्र भक्ति का अलख जगाते हुए सिख गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों की शौर्य गाथा भी सुनाई। उनकी शहादत और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान को सुनकर उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
भंडारे के साथ समापन
कथा के समापन पर महाआरती की गई, जिसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। हजारों भक्तों ने कतारबद्ध होकर प्रसादी ग्रहण की। सिद्धेश्वर धाम समिति ने बताया कि आगामी तीन दिनों में कथा के और भी अलौकिक प्रसंग सुनाए जाएंगे।










