एक रोटी कम खाएं, पर बच्चों को शिक्षित बनाएं

एक रोटी कम खाएं, पर बच्चों को शिक्षित बनाएं

  • कथा वाचिका देविका पटेल ने समाज को दिया शिक्षा और संस्कार का मंत्र
  • देविका पटेल ने रूढि़वादिता पर किया प्रहार

मंडला महावीर न्यूज 29. स्थानीय ग्राम करिया गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन जनमानस का सैलाब उमड़ पड़ा। कुर्मी समाज की प्रखर कथा वाचिका देविका पटेल ने अपनी मधुर वाणी से न केवल भक्ति का रस घोला, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक प्रगतिशील समाज के निर्माण का आह्वान किया।

शिक्षा और संस्कार ही असली पूंजी 

कथा के दौरान देविका पटेल ने पालकों को प्रेरित करते हुए कहा, आप भले ही अपने जीवन में एक रोटी कम खाएं और भौतिक सुख-सुविधाओं में कटौती करें, लेकिन अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कसर न छोड़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना संस्कार के शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। शिक्षा परिवार में संपन्नता लाने के साथ-साथ राष्ट्र के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

बेटियों की शिक्षा और महापुरुषों का ऋण 

लैंगिक भेदभाव पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल पराया धन मानकर शिक्षा से वंचित रखना गलत है। समाज के संतुलन के लिए बेटियों को सशक्त बनाना अनिवार्य है। उन्होंने सावित्री बाई फुले, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि आज हमें जो शिक्षा और समानता का अधिकार मिला है, वह इन्हीं महापुरुषों की देन है। उन्होंने बाबा साहब के मूलमंत्र शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो को जीवन में उतारने की अपील की।

बलि प्रथा और कुरीतियों का विरोध 

समाज में व्याप्त बलि प्रथा को अभिशाप बताते हुए देविका पटेल ने कहा कि जीव हत्या से ईश्वर कभी प्रसन्न नहीं होते। ईश्वर की बनाई सुंदर कलाकृति (जीव) को नष्ट करने के बजाय मनुष्य को अपने कुविचारों की बलि देनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने आधुनिक नामकरण पद्धति पर भी सवाल उठाए और सुझाव दिया कि बच्चों के नाम प्रकृति या ईश्वर के नाम पर रखें, ताकि जीवन के अंत समय में भी आराध्य का नाम मुख पर रहे।

सामाजिक चेतना का संचार 

गया जी (बिहार) के धार्मिक महत्व और पितरों की मुक्ति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भक्ति का मार्ग ही जीवन का सच्चा सुख है। कुल मिलाकर, देविका पटेल की कथा केवल धार्मिक आयोजन न रहकर समाज में नवीन चेतना और वैचारिक क्रांति लाने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।



 

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