मंडला की रेल सुविधाओं पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

मंडला की रेल सुविधाओं पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

  • जनता ने पूछा कब चलेगा आपके संघर्ष का सिक्का
  • महिष्मति नगरी को नवीन रेलमार्ग का इंतजार
  • राष्ट्रीय रेलवे संघर्ष समिति ने सांसद, विधायकों को जगाया

मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा तट की पावन नगरी महिष्मति मंडला के विकास में रेलवे की भूमिका को लेकर अब आम जनता का धैर्य जवाब देने लगा है। जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधियों के लंबे राजनीतिक संघर्ष के बावजूद धरातल पर नई रेल सुविधाओं का अभाव है। राष्ट्रीय रेलवे संघर्ष समिति और जिले की आम जनता ने अब सीधे तौर पर मंडला के सांसद और विधायकों से सवाल किया है कि उनके संघर्ष का लाभ आखिर जनता को कब मिलेगा?

जानकारी अनुसार 20 दिसंबर तक मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन के लिए ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे स्पष्ट हो सके कि पेंचवेली एक्सप्रेस का संचालन मंडला फोर्ट से इंदौर के बीच कब शुरू होगा। इसके साथ ही कोचिंग डिपो निर्माण का मामला भी अधर में लटका हुआ है। पुराने सर्वे के आधार पर बिलासपुर-मंडला-जबलपुर और गौरेला पेंड्रा-शहडोल-डिंडोरी-गोटेगांव नवीन रेलमार्गों की फाइलें धूल फांक रही हैं।

जनप्रतिनिधियों से सोने का सिक्का बनने की अपील 

क्षेत्र की जनता ने मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके, विधायक नारायण सिंह पट्टा और विधायक चैन सिंह वरकड़े का ध्यान केंद्रित करते हुए कहा है कि अब कुछ नया करने का समय आ गया है। जनता का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि इच्छाशक्ति दिखाएं और एक छोटा सा ठोस संघर्ष करें, तो नवीन रेलमार्ग और ट्रेनों का संचालन संभव है। जनता ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि आपके प्रयासों से ट्रेनें चलती हैं, तो आपका नाम इतिहास में सोने के सिक्के की तरह चमक उठेगा। यह नाम कमाने का सबसे बड़ा अवसर है। यदि जनता स्वयं सड़कों पर उतरी, तो यह जिले की छवि के लिए ठीक नहीं होगा। अब देखना यह है कि जिले के ये दिग्गज नेता जनता की पुकार पर कब जागते हैं और रेल मंत्रालय से आदेश कब दिलवाते हैं।

इनका कहना है

हम वर्षों से पेंचवेली को इंदौर तक बढ़ाने और नए रेलमार्गों की मांग कर रहे हैं। सर्वे हो चुके हैं, लेकिन आदेश की फाइलें दिल्ली में दबी हैं। हमारे जनप्रतिनिधियों का रसूख केंद्र और राज्य दोनों जगह है, फिर भी मंडला फोर्ट स्टेशन आज वीरान पड़ा है। अगर जल्द ही कोचिंग डिपो और नई ट्रेनों पर फैसला नहीं हुआ, तो जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


रंजीत कछवाहा, समाजसेवी

मंडला को महिष्मति कहना गर्व की बात है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर हम पिछड़े हुए हैं। इंदौर और जबलपुर के लिए सीधी ट्रेन न होने से व्यापार और इलाज दोनों प्रभावित होते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे सांसद और विधायक इस मुद्दे को केवल चुनाव में न उठाएं, बल्कि इसे धरातल पर उतारकर सोने के सिक्के जैसा काम करें, जिससे आने वाली पीढिय़ां उन्हें याद रखें।


रितेश पमनानी, स्थानीय व्यापारी

डिंडोरी, शहडोल और गोटेगांव जैसे रूट जुडऩे से मंडला के युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे। पुराने सर्वे के हिसाब से नवीन रेलमार्ग बनाना अब समय की मांग है। जनप्रतिनिधियों का संघर्ष तभी सार्थक माना जाएगा जब हमें स्टेशन पर नई ट्रेनों की सीटी सुनाई देगी। हम बस वादे नहीं, बल्कि ट्रेन का संचालन और डिपो का निर्माण देखना चाहते हैं।


प्रभज्योत सिंह धामी, छात्र



 

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