नर्मदा घाटी की बांध परियोजनाओं में आंकड़ों का खेल: सरकारी फाइलों और हकीकत में बड़ा अंतर

नर्मदा घाटी की बांध परियोजनाओं में आंकड़ों का खेल: सरकारी फाइलों और हकीकत में बड़ा अंतर

पुनर्वास पैकेज तो बढ़ा, पर प्रभावितों की सही संख्या पर उठे सवाल, बसनिया और राघवपुर में बढ़ सकता है डूब क्षेत्र

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में अपर नर्मदा, राघवपुर और बसनिया बांध परियोजनाओं के लिए पुनर्वास पैकेज बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। लेकिन, सरकार द्वारा पेश किए गए प्रभावित परिवारों के आंकड़े अब विवादों के घेरे में हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी और धरातलीय परिस्थितियों के बीच का अंतर एक बड़े ‘सर्वे घोटाले’ की ओर इशारा कर रहा है।

आंकड़ों का गणित: क्या छुपा रही है सरकार?

कैबिनेट की बैठक में तीनों बांधों से कुल प्रभावितों की संख्या 13,873 परिवार बताई गई है। वहीं, RTI के आंकड़ों के अनुसार:

  • बसनिया बांध: 2,737 परिवार प्रभावित।
  • राघवपुर बांध: लगभग 957 परिवार प्रभावित।
  • इन दोनों का कुल योग 3,694 होता है।

सवाल यह उठता है कि क्या अकेले अपर नर्मदा बांध से 10,179 परिवार प्रभावित होंगे? जबकि इस बांध से मात्र 27 गांव (4 पूर्ण विस्थापित, 23 आंशिक) प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि या तो अपर नर्मदा के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जा रहे हैं या फिर बसनिया और राघवपुर में प्रभावितों की वास्तविक संख्या को जानबूझकर कम आंका गया है।

सर्वे की त्रुटियां और ‘बरगी’ का कड़वा अनुभव

बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा का कहना है कि बांधों का सरकारी सर्वे अक्सर केवल कानूनी डूब क्षेत्र तक सीमित रहता है। इसमें ‘बैकवाटर’ (पीछे फैलने वाला पानी), कृषि भूमि, जंगल और पेयजल स्रोतों पर पड़ने वाले अप्रत्यक्ष प्रभावों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • पुराना सबक: बरगी बांध के समय सैकड़ों किसानों की जमीनें बिना अधिग्रहण के डूब गईं, जबकि कुछ की जमीनें कागजों में डूबीं पर असल में सूखी रहीं, जिसके लिए किसान आज भी भटक रहे हैं।
  • सरदार सरोवर का उदाहरण: यहाँ भी प्रभावित गांवों की संख्या 192 से घटाकर 176 कर दी गई थी, जिससे हजारों परिवार मुआवजे से वंचित रह गए।

टोपोशीट बनाम जमीनी हकीकत

वर्तमान में बसनिया बांध के डूब क्षेत्र की गणना केवल टोपोशीट (मानचित्रों) के आधार पर की गई है। जानकारों का कहना है कि जब गांव-गांव जाकर प्रत्यक्ष सर्वे होगा, तो डूब के रकबे और विस्थापित परिवारों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी होना तय है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे में ग्राम सभाओं की अनुमति नहीं ली गई और न ही वास्तविक प्रभावितों का न्यूनतम आकलन किया गया।

विस्थापन का दंश: एक नजर में

नर्मदा नदी पर प्रस्तावित 29 बड़े बांधों में से अब तक बने बांधों के कारण लगभग 625 गांवों के 96,500 परिवार प्रभावित हो चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि बांध सर्वे केवल कानूनी सीमा तक न होकर “पूर्ण प्रभाव” (Total Impact) को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए ताकि कोई भी प्रभावित न्याय से वंचित न रहे।


मुख्य बिंदु:

  • सरकारी दावा: तीन बांधों से 13,873 परिवार प्रभावित।
  • RTI का खुलासा: बसनिया और राघवपुर में केवल 3,694 परिवार।
  • बड़ा सवाल: क्या कागजी सर्वे में प्रभावितों की संख्या घटाई गई है?
  • मांग: जमीनी सर्वे और ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।

 

 

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