मिट्टी में दबे पक्के घाट, बढ़ रहा हादसों का डर

आस्था पर भारी प्रशासनिक उदासीनता

  • बदहाली का शिकार महाराजपुर त्रिवेणी संगम, कीचड़ में स्नान को मजबूर होंगे श्रद्धालु
  • त्रिवेणी संगम पर अव्यवस्थाओं का अंबार
  • मिट्टी में दबे पक्के घाट, बढ़ रहा हादसों का डर
  • मकर संक्रांति करीब, पर अब तक न सफाई हुई न सुरक्षा के इंतजाम

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले का सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं आस्था का केंद्र महाराजपुर स्थित त्रिवेणी संगम इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आगामी मकर संक्रांति और नर्मदा जयंती जैसे बड़े पर्वों में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन संगम स्थल पर प्रशासनिक उदासीनता के कारण चारों ओर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो हजारों श्रद्धालुओं को इस वर्ष कीचड़ और गंदगी के बीच ही पावन स्नान करना पड़ेगा।

जानकारी अनुसार संगम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूर्व में पक्के घाट और सीढिय़ों का निर्माण किया गया था। विडंबना यह है कि उचित देखरेख और सफाई के अभाव में ये घाट पूरी तरह मिट्टी और कीचड़ की मोटी परतों से ढक चुके हैं। फिसलन भरी इन सीढिय़ों के कारण मकर संक्रांति पर बड़े हादसों की आशंका बनी हुई है।

अंतर्राज्यीय आस्था का केंद्र 

स्थानीय निवासियों ने बताया कि त्रिवेणी संगम में मंडला सहित बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए पहुंचते हैं। इतनी व्यापक भीड़ के बावजूद न तो घाटों की पुताई कराई गई है और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम दिखाई दे रहे हैं।

अतिक्रमण और गंदगी से घुट रहा दम 

श्रद्धालुओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में सामाजिक कुंभ के दौरान इस तीर्थ स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, लेकिन वर्तमान में निजी स्वार्थ के चलते नर्मदा तट तक अवैध दुकानें सज गई हैं। प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण के कारण भक्तों को पैदल चलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है।

त्वरित कार्रवाई की मांग 

क्षेत्रीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि मकर संक्रांति से पूर्व घाटों की सफाई, मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे और आयोजन गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।


 

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