नवाचारों से बदल रही स्कूलों की सूरत

नारायणगंज में खेलों का महाकुंभ

  • संकुल स्तरीय प्रतियोगिताओं से निखर रही ग्रामीण खेल प्रतिभाएं
  • शिक्षा और खेल के संगम से आकांक्षी नारायणगंज बनेगा अग्रणी
  • नवाचारों से बदल रही स्कूलों की सूरत

मंडला महावीर न्यूज 29. नारायणगंज विकासखण्ड इन दिनों खेल और उत्साह के रंग में रंगा हुआ है। यहाँ संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन ने न केवल वातावरण को खेलमय बना दिया है, बल्कि वर्षों बाद हुए इन आयोजनों से विद्यार्थियों और शिक्षकों में अपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।
विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डीके सिंगौर के नेतृत्व में संचालित मेरा विद्यालय, सुंदर विद्यालय नवाचार का व्यापक असर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इस पहल से विकासखण्ड के लगभग 90 प्रतिशत विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त हुई हैं, जिससे छात्रों को शिक्षा के लिए एक बेहतर और सकारात्मक वातावरण प्राप्त हो रहा है।

प्रतिभाओं को मिला मंच 

संकुल केंद्र बबलिया और मंगलगंज में प्रतियोगिताएं संपन्न होने के बाद अब बम्हनी भवाल, मानेगांव और माड़ोगढ़ में खेल स्पर्धाएं जारी हैं। शिक्षा स्थाई समिति के अध्यक्ष अविनाश शर्मा के आग्रह और समिति द्वारा पारित संकल्प प्रस्ताव के तहत आयोजित इन प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें मंच प्रदान करना है।

जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित 

इन आयोजनों के दौरान क्षेत्रीय विधायक चैन सिंह वरकड़े, जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र वरकड़े, जनपद अध्यक्ष आशाराम भारतीया और उपाध्यक्ष अविनाश शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। सभी ने विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन किया।

नारायणगंज को अग्रणी बनाने का प्रयास 

बीईओ डीके सिंगौर ने बताया कि नारायणगंज को केंद्र सरकार के आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके लिए 11 महत्वपूर्ण मानक निर्धारित किये गए हैं। उन्होंने कहा कि ये खेल प्रतियोगिताएं इन मानकों को पूरा करने में एक सीढ़ी की तरह हैं। यदि हम इन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेते हैं, तो विकासखण्ड को पुरस्कार स्वरूप 3 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी, जिसका उपयोग क्षेत्र को अग्रणी बनाने में किया जाएगा।

पुरस्कार वितरण के साथ प्रतियोगिता का समापन 

प्रतियोगिताओं के अंत में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। शिक्षा विभाग की इस प्रतिबद्धता से न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि वे अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक प्रेरित नजर आ रहे हैं। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि खेल और शिक्षा के समन्वय से ही एक विकसित समाज का निर्माण संभव है।



 

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