12 वर्ष में 76 हजार 231 जांचे, 762 मिले एड्स पाजीटिव

01 दिसंबर एड्स दिवस

  • 12 वर्ष में 76 हजार 231 जांचे, 762 मिले एड्स पाजीटिव
  • एड्स के मरीजों में पुरूष वर्ग ज्यादा
  • सबसे ज्यादा जांचे गर्भवती महिला की
  • जागरूकता से बचाव संभव

मंडला महावीर न्यूज 29. एड्स एक लाइलाज बीमारी है, इस बीमारी में व्यक्ति के अंदर रोग से लडऩे की क्षमता कम हो जाती है एवं व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है। जिले में पिछले 12 सालों में एड्स रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिले में वर्ष 2013 से अक्टूबर 2025 तक इन 12 वर्षो में 76 हजार 231 पुरूष, महिला और गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिसमें 762 एड्स रोगी सामने आए है। समय के साथ परिस्थितियां भी बदली है। एड्स के कारण और निवारण के प्रति लोग जागरूक हुए है। जिसके चलते साल दर साल एड्स की जांच के मामलों में वृद्धि हुई है। यही वजह है कि एड्स रोगी सामने आ रहे है। वर्ष 2013 में 5542 एड्स की जांच की गई। जिसमें 1923 पुरूषों और 771 महिलाओं ने एड्स की जांच कराई। जिसमें 34 पुरूष एवं 10 महिलाएं पॉजीटिव निकली।इसी तरह वर्ष 2013 में गर्भवती स्त्रियों की जांच की गई, जिसमें 2848 गर्भवती महिलाओं में से 12 पॉजीटिव निकली। वर्ष 2013 का आंकड़ा वर्ष 2019 में बढ़ गया। वर्ष 2019 में 9415 जांच की गई। जिसमें 1343 पुरूष, 2737 महिलाएं और 5335 गर्भवती महिलाओं ने एड्स की जांच कराई। जिसमें 33 पुरूष, 34 महिलाएं और 09 गर्भवती महिलाएं पॉजीटिव आई। इसी तरह वर्ष 2021 में जांचों का आंकड़ा 6739 रहा। जिसमें 43 पुरूष, 25 महिला और 04 गर्भवती महिलाएं पॉजीटिव आई। एड्स के मरीजों को समय समय में चिकित्सी सलाह एवं उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। एड्स से बचने के उपाय भी लोगों को बताए जा रहे है।बताया गया कि प्रति वर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करना है। जागरूकता के तहत लोगों को एड्स के लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाती है और इसके साथ ही जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए जाते हैं जिससे इस महामारी को जड़ से खत्म करने के प्रयास किए जा सकें। साथ ही एचआईवी एड्स से ग्रसित लोगों की मदद की जा सकें।

36 हजार 310 गर्भवती की जांच, 77 पॉजीटिव 

वर्ष 2013 से अक्टूबर 2025 तक 36 हजार 310 गर्भवती महिलाओं की जांच की गर्ई। इन 12 वर्षो में जांच के दौरान 77 महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव आई। एचआईवी जांच में पुरूष वर्ग व महिला वर्ग से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। शासकीय अस्पताल में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जाती है। इन 11 वर्षो में वर्ष 2013 में 12 गर्भवती महिला पॉजीटिव थी, जिसके बाद आंकड़े कम होते गए। वर्ष 2018 में 5 गर्भवती महिला पॉजीटिव आई। जिसके बाद इन आंकड़ों की रफ्तार बढऩे लगी। वर्ष 2019 में 09 केस, वर्ष 2020 में 10 केस, वर्ष 2021 में 04 केस और वर्ष 2022 अक्टूबर तक 09 पॉजीटिव केस के बाद यह आंकड़ा वर्ष 2023 में एक बार फिर कम हो गया और यह आकंड़ा 4 में आकर रूक गया, लेकिन वर्ष 2024 में तीने पॉजीटिव केस बढ़ गए और आंकड़ा 07 पर पहुंच गया। वहीं इस वर्ष 2025 में पॉजीटिव केस कम हुए और पांच पॉजीटिव केस ही मिले।

वर्ष 2022 में 92 एचआईवी पॉजीटिव 

12 वर्षो में वर्ष 2013 से 2022 तक 611 एचआईवी पॉजीटिव केस मिले है। वर्ष 2013 में 56 केस मिले, जिसके बाद यह आंकड़ा वर्ष 2014 से 2017 तक 30 से 50 के बीच रहा। लेकिन वर्ष 2018 से संक्रमितों की संख्या में एक दम से बढ़ोत्तरी हुई। जिसमें 2018 में 8793 जांच करने के बाद 74 एचआईवी संक्रमित केस मिले। इसी तरह 2019 में 9415 व्यक्तियों की जांच में 76 केस निकले। यह आंकड़ा कम होने के वजाए फिर बढ़ा और 2020 में 6093 जांच में 79 पॉजीटिव, वर्ष 2021 में 6739 जांच में 72 पॉजीटिव और वर्ष 2022 में 6003 जांचोंं में 92 पॉजीटिव केस, वर्ष 2023 में 4056 जांच में 72 केस और वर्ष 2024 में अक्टूबर 2024 में 3024 जांचों में 38 केस सामने आए। वर्ष 2025 में 5487 जांचों में 41 केस सामने आए। वहीं वर्ष 2022 में 92 पॉजीटिव केस का यह आंकड़ा पूरे 12 सालों में सबसे ज्यादा रहा।

एड्स पीडि़त बच्चों को मिल रहा शासन की योजना का लाभ

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि केंद्र प्रायोजित मिशन वात्सल्य योजना के तहत गैर-संस्थागत देखभाल कार्यक्रमों के लिए प्रति बच्चा 4 हजार रुपए मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। जिसमें एड्स पीडि़त बच्चे भी शामिल है। माता-पिता या बच्चा किसी के भी एड्स प्रभावित होने उन्हें 18 वर्ष तक प्रतिमाह 4 हजार रुपए की राशि दी जाती है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें संस्थागत देखभाल के बिना शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य के लिए सहायता प्राप्त हो। जिले में पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन, मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा, मुख्यमंत्री बाल आर्शीवाद योजना के तहत बरीक 500 बच्चे लाभांवित है। जिसमें 40-45 बच्चों को उनके या अभिभावकों के एड्स प्रभावित होने के कारण लाभ मिल रहा है। साथ ही एचआईवी पीडि़त व्यक्तियों का नाम गोपनीय रखा जाता है।

1 से 7 दिसंबर तक मनाया जाएगा एड्स जागरूकता सप्ताह 

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी थीम अधिकारों की राह अपनाए मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार मनाया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है कि प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा की जाए, तो एड्स को विश्व से समाप्त किया जा सकता है। मानव अधिकारों को केंद्र में रखकर समुदायों की भागीदारी एवं जागरूकता से 2030 तक सार्वजनिक खतरे के रूप में एड्स को विश्व से खत्म किया जा सकता है। इस अवसर पर 1 दिसंबर से 7 दिसंबर तक एड्स पखवाड़ा मनाया जाना है। जिसमें एचआईवी एड्स की रोकथाम के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।


अप्रैल 2013 से अक्टूबर 2025 तक कुल जांच एवं नतीजे

नोट- वर्ष 2025 के आंकड़े जनवरी से अक्टूबर 2025 तक के है।



 

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