विश्वस्तरीय दर्जे का सपना, हकीकत में सुविधाओं का टोटा

विश्वस्तरीय दर्जे का सपना, हकीकत में सुविधाओं का टोटा

  • मंडला फोर्ट स्टेशन पर टिकट के लिए लग रही लंबी कतारें
  • मूलभूत सुविधाओं का अभाव
  • मंडला फोर्ट स्टेशन पर यात्री हलकान
  • अमृत योजना के तहत विकास की कछुआ चाल

मंडला महावीर न्यूज 29. ऐतिहासिक महत्व रखने वाला मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन इन दिनों अपने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हो रहे कायाकल्प के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों को हो रही भारी असुविधाओं के लिए चर्चा में है। एक तरफ जहां इसे विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि यात्रियों को पीने के पानी और टिकट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।जानकारी अनुसार विकास की धीमी रफ्तार और यात्रियों की बढ़ती मुसीबतें रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि इसका सीधा असर यात्रियों और नई ट्रेनों के संचालन पर पड़ रहा है। मंडला-इंदौर जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन सेवा की शुरुआत अटकी हुई है। सबसे विकट स्थिति टिकट काउंटर पर देखने को मिल रही है। यात्रियों की बढ़ती संख्या के मुकाबले टिकट काउंटर बेहद छोटा है, जिसके चलते सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाता। इसके साथ ही स्टेशन परिसर में कैंटीन, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं, जिससे विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यात्रियों की सुविधाओं के लिए उठी आवाज 

रेलवे संघर्ष समिति और स्थानीय नागरिकों ने एक स्वर में प्रशासन से अपील की है कि ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए। स्थानीयजनों ने मांग की है कि मंडला फोर्ट स्टेशन में तत्काल बड़ा टिकट काउंटर शुरू किया जाए, पेंचवेली एक्सप्रेस का विस्तार और स्टेशन पर मूलभूत सुविधाएं जिसमें पानी, टॉयलेट, कैंटीन सुविधाएं दी जाने की मांग की है।

इनका कहना है

प्रशासन की अनदेखी और धीमी गति जिम्मेदार

मंडला फोर्ट का ऐतिहासिक महत्व है, लेकिन विभाग इसे नजर अंदाज कर रहा है। पेंचवेली एक्सप्रेस को मंडला से शुरू करने की मांग लंबे समय से लंबित है। साथ ही, नए रेलमार्ग के निर्माण को लेकर भी कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। निर्माण कार्यों की कछुआ चाल और आमजन की जरूरतों के प्रति उदासीनता यह दर्शाती है कि ठेकेदार और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं है। हमें विकास चाहिए, लेकिन यात्रियों की वर्तमान पीड़ा की कीमत पर नहीं।


अखिलेश सोनी, सदस्य, रेलवे संघर्ष समिति

घंटों लाइन में लगना हमारी मजबूरी बन गई है

हम अमृत योजना के नाम पर केवल धूल और मिट्टी देख रहे हैं। टिकट काउंटर इतना छोटा है कि वहां पैर रखने की जगह नहीं होती। अगर आप ट्रेन पकडऩे आ रहे हैं, तो आपको दो घंटे पहले आकर लाइन में लगना होगा। पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। क्या यही विश्वस्तरीय सुविधा है। हमारी मांग बस इतनी है कि तत्काल प्रभाव से एक बड़ा टिकट काउंटर खोला जाए जिससे आम आदमी का समय और सम्मान दोनों बच सके।


नितिन सोलंकी, रेल यात्री



 

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