ऑयस्टर मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भर बन रहीं सीमांत महिला किसान

नारी शक्ति की नई उड़ान

  • ऑयस्टर मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भर बन रहीं सीमांत महिला किसान
  • कृषि वेस्ट से बेस्ट आय, सुरंगदेवरी और माली मोहगांव की महिलाओं ने थामी मशरूम खेती की कमान

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुरंगदेवरी और माली मोहगांव में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी जा रही है। यहाँ की सीमांत महिला किसानों ने परंपरागत खेती से हटकर अब ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा है। मध्यप्रदेश समाज सेवा संस्था और कारितास इंडिया की नव-परिवर्तनकारी पहल के तहत आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण शिविर में 42 महिला किसानों ने भाग लिया और स्वरोजगार की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।
बताया गया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है। अक्सर किसान कृषि कार्य से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल अवशेषों को जला देते हैं या फेंक देते हैं, लेकिन इस प्रशिक्षण में महिलाओं को सिखाया गया कि कैसे उसी वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर सस्ता और पोषण से भरपूर मशरूम उगाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों को समझा और अपने हाथों से 38 मशरूम बैग भी तैयार किए। यह अनुभव उनके लिए न केवल नया था, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी साबित हुआ।

आजीविका का नया और सशक्त माध्यम 

यह कार्यक्रम केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया बन रहा है। प्रशिक्षण में शामिल महिला किसानों ने बताया कि मशरूम उत्पादन उनके लिए अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन साधन बनकर उभरा है। अब वे इसे घरेलू स्तर पर शुरू कर एक स्थायी स्वरोजगार के रूप में अपनाने की तैयारी कर रही हैं। वे अब अन्य सीमांत किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

घर में कर सकते है मशरूम उत्पादन 

मध्यप्रदेश समाज सेवा संस्था द्वारा संचालित साफबिन परियोजना क्षेत्र में छोटे किसानों की खाद्य सुरक्षा और खाद्य विविधता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था के समन्वयक प्रद्युमन धरवैया ने बताया कि ऑयस्टर मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। उन्होंने बताया कि महिलाएं इसे घर पर ही आसानी से शुरू कर सकती हैं और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जुड़कर सामूहिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने और उत्पादन यूनिट स्थापित करने में सुशील प्रकाश, रमेश आंधवान, हजारी सैयाम, रेखा यादव, सरोज बाई, सीमा उईके और दुकलु कुसराम ने विशेष और सक्रिय भूमिका निभाई।



 

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