तीन माह से लापता पति की तलाश में मां-बच्चे चार जिलों में भटके
- पुलिस ने झाड़ा पल्ला, प्रशासनिक लापरवाही से जूझकर कलेक्ट्रेट पहुंची मजबूर पत्नी
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला की एक महिला सुशीला रजक पिछले तीन महीनों से अपने दो छोटे बच्चों 13 वर्षीय प्रांजल और 3 वर्षीय अनुराग के साथ अपने लापता पति रामकुमार रजक की तलाश में दर-दर भटक रही है। मजदूरी करके पेट पाल रहे इस परिवार को प्रशासनिक मदद न मिलने और पुलिस की क्षेत्राधिकार की उलझन में फंसकर लगातार निराशा का सामना करना पड़ रहा है। थक-हारकर सुशीला मंगलवार को अपने पिता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची और न्याय की गुहार लगाई।
जानकारी अनुसार स्वामी सीताराम वार्ड निवासी सुशीला का विवाह सिवनी जिले के धनोरा निवासी रामकुमार से हुआ था, जो मजदूरी करते थे। सुशीला ने बताया कि उनके पति आखिरी बार रक्षाबंधन पर घर आए थे। इसके बाद वह जबलपुर चले गए और 25 अगस्त को किसी अन्य नंबर से उन्होंने आखिरी बार बात की थी, जिसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं चला है।
पति की तलाश में सुशीला बच्चों को साथ लेकर जबलपुर के मदन महल और आसपास के इलाकों में भटकती रहीं। इसी दौरान राजेन्द्र धुर्वे नामक एक व्यक्ति ने उन्हें झूठी सूचना दी कि रामकुमार की करेली नरसिंहपुर में एक दुर्घटना में मौत हो गई है। जब सुशीला उस व्यक्ति के साथ करेली पहुंची, तो वह उन्हें चकमा देकर रास्ते में ही भाग गया। इसके बाद में करेली पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मृतक रामकुमार कछवाहा था, न कि सुशीला का पति और यह नाम व पते की समानता के कारण भ्रम हुआ था।
सीएम हेल्पलाईन में की शिकायत
बताया गया कि मदद के लिए सुशीला को पुलिस की उदासीनता का भी सामना करना पड़ा। मंडला कोतवाली ने उन्हें जबलपुर भेज दिया, जबकि जबलपुर के मदन महल थाने ने वापस मंडला भेज दिया। कई चक्कर काटने के बाद उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद आवेदन तो लिया गया, लेकिन आज तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। सुशीला का कहना है कि वह मजदूरी करके किसी तरह बच्चों का पेट पाल रही है, और इस मुश्किल स्थिति में उसका भटकना बेहद दर्दनाक है। उन्होंने जनसुनवाई में पुन: आवेदन देकर पति की तलाश में तत्काल मदद की मांग की है।










