AITE-2026 के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व कर रहा है 6 हजार वर्ग किमी लैंडस्केप का नेतृत्व

बाघों की गणना-एआईटीई-2026 के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व कर रहा है 6 हजार वर्ग किमी लैंडस्केप का नेतृत्व

  • विश्व के सबसे बड़े वन्यजीवन मॉनिटरिंग कार्यक्रम के तीन चरण शुरू
  • कान्हा में कैमरा ट्रैप तैनाती का कार्य तेज

मंडला महावीर न्यूज 29. आगामी अखिल भारतीय बाघ आकलन के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व को पूरे कान्हा लैंडस्केप के लिए नोडल नियुक्त किया गया है। यह आकलन न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा वन्यजीवन मॉनिटरिंग कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य केवल बाघों की वास्तविक संख्या का आंकलन करना नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना भी है, जो वन्यजीव संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प को बल देता है।जानकारी अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा लैंडस्केप के लगभग 6 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का नेतृत्व कर रहा है। इस व्यापक क्षेत्र में आठ वन मंडल और संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं, जिसमें पूर्व मंडला, पश्चिम मंडला, डिंडोरी, उत्तर बालाघाट, दक्षिण बालाघाट, लामटा प्रोजेक्ट, मोहगांव प्रोजेक्ट, फेन अभयारण्य और स्वयं कान्हा टाइगर रिजर्व है।

तीन चरणों में संपादित होगा कार्य 

एआईटीई-2026 का कार्य वैज्ञानिक रूप से तीन चरणों में संपादित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत कान्हा लैंडस्केप में हो चुका है। प्रथम चरण 1 दिसम्बर 2025 से शुरू होगा। इस चरण में देशभर से चयनित स्वयंसेवक वन विभाग की टीम के साथ कार्निवोर साइन सर्वे और ट्रांसक्ट लाइन सर्वे में हिस्सा लेंगे। हजारों किलोमीटर के वन पथों पर मांसाहारी वन्यजीवों के पदचिह्न, स्कैट (मल) और अन्य प्रमाण तथा ट्रांजेक्ट लाइन पर शाकाहारी वन्यजीवों के प्रत्यक्ष दर्शन सहित आवश्यक डेटा दर्ज किया जाएगा। वहीं द्वितीय चरण में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान प्राप्त डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कार्य संपादित करेंगे। इसके साथ ही तृतीय चरण 15 नवम्बर से शुरू हो चुका है। जिसमें कैमरा ट्रैप तैनाती का कार्य पूरे कान्हा लैंडस्केप में शुरू हो चुका है। इस चरण में चार ब्लॉकों में कैमरा ट्रैप तैनाती का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिसे अगले चार महीनों में पूर्ण करने का लक्ष्य है। इस कार्य के लिए विशेष कैमरा ट्रैप टास्क फोर्स गठित की गई है, जिसका नेतृत्व फील्ड डायरेक्टर कान्हा टाइगर रिजर्व कर रहे हैं।

बाघ संरक्षण की पहल 

इस पूरी प्रक्रिया में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के शोधकर्ता भी क्षेत्रीय टीम के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे डेटा संग्रह की सटीकता, फील्ड वैलिडेशन और वैज्ञानिक गुणवत्ता और भी मजबूत हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व के नेतृत्व में यह प्रक्रिया सुगठित, व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीकों से संचालित होने की अपेक्षा है, जो राष्ट्रीय बाघ संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।



 

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