मुनिद्वय ने किया एक, दूसरे के चरणों का स्पर्श, नम हुईं आंखें

मुनिद्वय ने किया एक, दूसरे के चरणों का स्पर्श, नम हुईं आंखें

  • कार्तिक अष्टानिक महापर्व संपन्न, पिंडरई में 26 मंडलीय सिद्ध चक्र विधान की पूर्णाहुति
  • पिंडरई में वात्सल्यमयी पिच्छिका परिवर्तन

मंडला महावीर न्यूज 29. लघु तीर्थ क्षेत्र व्रती नगरी पिंडरई में कार्तिक माह के अष्टानिक महापर्व पर आयोजित 26 मंडलीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का सानंद समापन हो गया। विधान की समाप्ति पर नगर में विराजमान मुनिश्री नीरज सागर एवं मुनिश्री निर्मद सागर का वात्सल्यमयी पिच्छिका परिवर्तन समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।बताया गया कि दिन का शुभारंभ श्री जी एवं नवीन पिच्छिका की शोभा यात्रा के साथ हुआ। श्री विद्या स्वभाव भवन में आयोजित बृहद कार्यक्रम में मुनिद्वय के गृहस्थ जीवन के परिजनों द्वारा आचार्य भगवन की सक्रिय पूजन रामायण को आधार बनाकर की गई, जो आकर्षण का केंद्र रही। साधु सेवा समिति के पदाधिकारी ऋषभ कुमार जैन ने बताया कि आयोजन का सबसे हृदयग्राही दृश्य वह था जब दोनों मुनिराजों ने एक-दूसरे को नवीन पिच्छिका प्रदान की और एक-दूसरे के चरणों का स्पर्श किया, जिसे देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

मुनिश्री नीरज सागर की पुरानी पिच्छिका जुली संदीप जी बड़े बाबा वॉच परिवार और मुनिश्री निर्मद सागर की पुरानी पिच्छिका प्रकृति प्रलभ जैन को प्राप्त हुई। शाकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष चौधरी कैलाश जैन, सरपंच संदीप जी मरकाम सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और आस-पास के नगरों से श्रद्धालु उपस्थित रहे।


 

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