उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा के लिए पुणे से पहुंचा श्रद्धालुओं का पहला समूह

उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा के लिए पुणे से पहुंचा श्रद्धालुओं का पहला समूह

  • मंडला में शुरू हुई वर्ष भर चलने वाली उत्तरवाहिनी परिक्रमा की नई परंपरा
  • माँ नर्मदा की महिमा से मंडला बना देश-विदेश के भक्तों का केंद्र
  • चैत्र माह के अलावा अब वर्ष भर होगी परिक्रमा

मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा भक्तों के लिए एक नई परंपरा का आगाज करते हुए पुणे के श्रद्धालुओं का एक समूह महिष्मति नगरी मंडला पहुंचा है। इस समूह ने चैत्र माह के पारंपरिक समय से अलग नवंबर में ही माँ नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा शुरू कर दी है। यह पिछले 4-5 वर्षों में पहला ऐसा समूह है जो चैत्र माह के अलावा माँ नर्मदा की परिक्रमा करने आया है, जिससे अब मंडला में नर्मदा भक्तों का वर्ष भर आगमन होने की संभावना बढ़ गई है।जानकारी अनुसार मंडला जिले की महिमा और गरिमा माँ नर्मदा के उत्तरवाहिनी प्रवाह से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में भगवान वेदव्यास जी की कृपा से मैया नर्मदा ने अपना मार्ग बदलकर इस नगरी में मंडलाकार रचना की थी, तभी से यह क्षेत्र उत्तरवाहिनी प्रवाह के आशीर्वाद के लिए जाना जाता है। कुछ वर्ष पूर्व संतों द्वारा इस दिव्यता की जानकारी दिए जाने के बाद से ही यह परिक्रमा शुरू हुई थी, जो अभी तक मुख्य रूप से चैत्र महीने में ही की जाती थी।

नर्मदा परिक्रमा का हुआ विधिवत शुभारंभ 

बताया गया कि पुणे से आए श्रद्धालु 09 नवंबर को मंडला पहुंचे और महाराजपुर स्थित राधाराज आश्रम में रात्रि विश्राम किया। 10 नवंबर की सुबह 6 बजे राधाराज आश्रम के प्रबंधक घनश्याम बर्मन ने समूह को श्री व्यास नारायण मंदिर किला घाट तक पहुँचाया। उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा आयोजन समिति के सुधीर कांसकार ने समूह को परिक्रमा का पूरा रूट चार्ट विस्तार से समझाया। इसके बाद पंडित रामायण दुबे ने विधिवत संकल्प पूजन कराकर भक्तों को तट परिवर्तन के लिए रवाना किया। आयोजकों ने इस पहल पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह नई परंपरा शुरू होती है, तो महिष्मति उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा के लिए वर्ष भर मंडला में श्रद्धालुओं का आगमन होगा, जिससे जिले की गरिमा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।



 

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