खुशियों की दास्तां, हल्दी की खुशबू से मिली नई पहचान
- किसान ने मक्के की खेती छोड़ बनाई आत्मनिर्भरता की मिसाल
- उद्यानिकी विभाग के सहयोग से 1.5 एकड़ में कमा रहे धर्मराज सिंह स्थायी मुनाफा
- उद्यानिकी विभाग के सहयोग से बदली किस्मत
मंडला महावीर न्यूज 29. जहां चाह, वहां राह, इस कहावत को जिले के ग्राम लावर के किसान धर्मराज सिंह ने सच कर दिखाया है। परंपरागत मक्का की खेती में घाटा देखने के बाद आठ वर्ष पूर्व उद्यानिकी विभाग की हल्दी प्रदर्शन योजना के तहत खेती में बदलाव कर उन्होंने हल्दी की खेती शुरू की। आज उनकी मेहनत नई तकनीक और जैविक खेती की सोच ने उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि पूरे जिले के किसानों के लिए वे प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
जानकारी अनुसार धर्मराज सिंह ने वर्ष 2017 में उद्यानिकी विभाग के सहयोग से खेती का यह नया रास्ता पकड़ा। विभाग ने उन्हें कर्नाटक हल्दी के 250 किलोग्राम बीज और आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने अपनी 1.5 एकड़ भूमि पर हल्दी की खेती का सफल प्रयोग किया। पहले वर्ष ही अच्छा उत्पादन मिलने के बाद उन्होंने स्वयं का बीज तैयार किया और हर साल हल्दी की फसल लेना जारी रखा। धर्मराज सिंह ने बताया कि विभाग के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से मुझे खेती में एक नया और स्थायी रास्ता मिला है। अब हल्दी से ही मेरी स्थायी आमदनी सुनिश्चित हो गई है।
फलदार पौधों से हुआ दोहरा लाभ
कृषक धर्मराज ने बताया कि हल्दी छायादार क्षेत्रों में अधिक उपज देती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के सुझाव पर अपने खेत में आम और नींबू के पौधों का रोपण किया है। यह नवाचार दोहरा लाभ दे रहा है। इससे हल्दी की फसल को आवश्यक छाया मिलती है, वहीं सीजन के दौरान फलों की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है।
जैविक पद्धति से बढ़ी मांग और कीमत
धर्मराज सिंह ने बताया कि वह अपनी हल्दी की खेती को पूरी तरह जैविक पद्धति पर आधारित रखा है। फसल लगाने से पहले वे केवल गोबर की खाद का उपयोग करते हैं और किसी भी रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल नहीं करते। यही कारण है कि उनकी जैविक हल्दी की मांग जबलपुर सहित आसपास के बाजारों में लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में उन्हें अपनी उपज के लिए 90 से 95 रूपए प्रति किलोग्राम तक की बेहतर कीमत मिल रही है। अपनी 1.5 एकड़ भूमि से वे प्रति वर्ष 15 से 18 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और स्थायी आय प्राप्त हो रही है।
किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
धर्मराज सिंह ने जिले के किसानों से आह्वान करते हुए कहां कि यदि किसान शासन की योजनाओं का लाभ लें और नई तकनीक को अपनाएं तो छोटी भूमि से भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। उनका यह सफल प्रयास न केवल ग्राम लावर बल्कि समूचे जिले के किसानों के लिए नई राह दिखा रहा है।











