परिक्रमा एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम
- जहां देवताओं का वास, वही निवास है-संत दादा गुरु
- अखिल भारतीय संत 5 नवंबर से ओंकारेश्वर से करेंगे नर्मदा पदयात्रा का शुभारंभ
मंडला महावीर न्यूज 29. निवास नगर में सोमवार का दिन अध्यात्म और भक्ति की छटा से सराबोर रहा। प्रख्यात संत दादा गुरु भैया जी सरकार के आगमन पर श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। रसलगंज यज्ञ शाला कॉलोनी के श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, नारियल वंदन और जयघोषों के साथ उनका भावपूर्ण स्वागत किया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया। दादा गुरु का काफिला इसके बाद नगर के शतचंडी मैदान पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही उपस्थित थे। मंच पर पहुंचते ही हर-हर नर्मदे के जयघोष गूंज उठे।
दादा गुरु ने अपने आशीर्वचन में माँ नर्मदा की महिमा का वर्णन करते हुए निवास नगर की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि जहाँ देवताओं का होता है वास, उसका नाम निवास है। आप लोग बड़े भाग्यशाली हैं कि आपको इस पवित्र स्थल के दर्शन हुए। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम है। उन्होंने नर्मदा को समस्त सृष्टि की जीवनदायिनी शक्ति बताते हुए कहा कि जो भी श्रद्धाभाव से उनकी परिक्रमा करता है, उसके संपूर्ण कुल का कल्याण होता है।
कौन हैं दादा गुरु
दादा गुरु एक प्रख्यात संत, साधक और समाजसेवी हैं, जिन्होंने पिछले लगभग पांच वर्षों से अन्न का त्याग कर रखा है और केवल माँ नर्मदा का पवित्र जल ही ग्रहण करते हैं। वे अपने प्रवचनों में लोगों को सत्य, सेवा और नशामुक्ति का संदेश देते हैं। उनके आशीर्वचन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उनके सान्निध्य में पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। आशीर्वचन के बाद दादा गुरु का काफिला अमरकंटक की ओर रवाना हो गया। बताया गया है कि 5 नवंबर से ओंकारेश्वर से दादा गुरु की पावन नर्मदा पदयात्रा का शुभारंभ होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।











