रोशनी से जगमगाया शहर, जमकर हुई आतिशबाजी

रोशनी से जगमगाया शहर, जमकर हुई आतिशबाजी

  • गोर्वधनपूजा की, भाई दूज से शुरू होगा मड़ई मेले का आयोजन

मंडला महावीर न्यूज 29. दीपावली पर्व का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। अमावस्य की रात दीप पर्व पर दीपक एवं पटाखों की रोशनी से अंधकार दूर हो गया। आकाश में रोशनी युक्त पटाखों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही। पर्व पर घर, प्रतिष्ठानों में शुभ मुर्हुत पर गणेश एवं लक्ष्मी पूजन किया गया। जिसके बाद पटाखे फूटने का दौर प्रारंभ हुआ। घरों प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजन करने के बाद बच्चों के साथ ही नौजवानों बड़ो ने भी जमकर पटाखे छोड़ आतिशबाजी की। देर रात तक पटाखें की गूंज सुनाई दी। आसमान में आतिशबाजी का नजारा देखने को मिला। दीपावली पर्व पर घर-घर में लोगों ने रंग-बिरंगी रंगोलियां उकेरकर दीप जलाए।

आकर्षक रोशनी से सराबोर रहा शहर 

अब परांपरागत मिट्टी के दीपक का प्रचलन कम होता जा रहा है। घर एवं प्रतिष्ठानों में पूजन एवं परांपरा को निभाते हुए मिट्टी के दीपक तो रोशन किए लेकिन अब विद्युत रोशनी का जमाना है। चायनीज झालर से विद्युत रोशनी से पूरा शहर जगमगाता रहा।

बच्चे, बड़ों सभी में उत्साह 

दीपावली पर्व में सभी में उत्साह देखा गया। घर परिवार में लोगें ने मिलकर पर्व उत्साह के साथ मनाया। परिवार सहित लोगों ने पटाखें फोड़े।

प्रतिष्ठानों में पूजन के बाद नए खाता प्रारंभ 

दीपावली पर्व व्यवसाय जगत के लिए भी खास होता है। पुराने खाता बही बंद कर नए खाते बही चालू किए जाते है। पूजन पाठ के बाद नए खातों का आगाज हुआ।

खूब बिके केले के मंडप 

दीपावली में प्रतिष्ठानों में साज सज्जा की गई थी। दुकानों को सजाया गया था। पूजन के लिए केले के मंडप बिकने आए। जिन्हें प्रतिष्ठानों में सामने लगाया गया।

घरों में बनाई गई आकर्षक रंगोली 

घर घर में दीपावली के दिन महिलाएं, युवतियां, बच्चे सुबह का काम काज जल्दी जल्दी करके अपने आंगन को माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए विभिन्न रंगो से आकर्षक एवं सुंदर रंगोलियां बनाई। जिससे घरों की रोनक में चार चांद लगा दिए।


घर-घर पहुंची अहीरों की टोली

  • परंपरिक वेशभूषा और बैंड, बाजों की धुन में किया नृत्य

मंडला महावीर न्यूज 29. पारंपरिक वेशभूषा और बैंड बाजों की धुन में मदमस्त होकर नृत्य करते अहीरों की टोली के गीत की धुन सुनने वाले को भी थिरकने से रोक नहीं सकता है। अहीर नृत्य परंपरागत रूप से आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में देखने मिलता है। जिले में यह परंपरा कई वर्षो से चली आ रही है। जिले के हर ग्रामों में अहीरी नृत्य की टोलियां दुकानों और घरों में जाकर परम्परा अनुसार नृत्य करते है। दीवाली और अमावस्या की रात से प्रारंभ अहीरों की यह परंपरा मड़ई मेलों के समापन तक जारी रहता है।

बताया गया कि दीपावली की रात में पूजा अर्चना के बाद यादव समाज के लोग अहीर की परंपरागत वेशभूषा धारण कर आशीष देने घर घर पहुंचे। जिसके बाद अहीर की टोली का घर-घर पहुंचने का दौर अब शुरू हो गया है। दीपावली के दूसरे दिन सुबह 9 बजे से अहीरों की टोली नृत्य करते हुए घर, दुकानों व प्रतिष्ठानो में पहुंचकर आशीष दिए। बैंडबाजे की धुन में नृत्य करती अहीर की टोली को देखने के लिए लोग भी उत्साहित रहते हैं। आगामी दिनो में भी जिले के विभिन्न क्षेत्र में लगने वाली मड़ई की शुरूआत चंडी पूजा के साथ अहीर ही करेंगे हैं।

राजेश यादव ने बताया कि अहीर नृत्य के लिए जिन परंपरागत वस्त्रों को धारण किया जाता है, उसकी पहले पूजा की जाती है। पूजा के बाद अहीर परंपरा अनुसार उस विशेष वस्त्र को धारण करके घर-घर और प्रतिष्ठानों में जाकर देव को जगाते है और लोग अहीरों की टोली को उपहार भेंट करके विदा करते है। यह सिलसिला जिले में आयोजित होने वाले मड़ई मेलों के समापन तक चलता रहता है। बताया गया कि ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुल वासियों के जीवन की रक्षा की थी। इस दौरान गोवर्धन पर्वत का भी पूजन किया जाता है।

अहीर कोडिय़ो से करते है श्रृंगार 

अहीरों की टोली दीवाली की रात से जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचलों में अपने परंपरिक वेशभूषा में सज धज कर निकलते है। उनके साथ गाजे-बाजे बजाने वाले भी साथ चलते है। श्रृंगार में अहीरी वेशभूषा आकर्षण का केन्द्र रहती है जो कोडिय़ों से जड़ी रहती है। नृत्य के दौरान बांसुरी वादन के साथ नृत्य करते हुए गीतों की प्रस्तुति लोगों का मनमोह लेती है।


 

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