अनिष्ट की आशंका में यहां एक दिन पहले ही मनाते है त्यौहार

अनिष्ट की आशंका में यहां एक दिन पहले ही मनाते है त्यौहार

  • नियत तिथि से पहले मनाई दीपावली, लोगों में रहा उत्साह
  • की गई लक्ष्मी पूजा, आज होगा सैला और कर्मा नृत्य

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में एक अनोखा गांव धनगांव विकासखंड मंडला और निवास के बीच करीब 40 किमी पर है। यह ग्राम धनगांव विकासखंड मोहगांव के सबसे अंतिम छोर में बसा है, जो मंडला और निवास के बीच में है। यहां कई वर्षो से चली आ रही एक अनोखी परंपरा है। जिसका निर्वाहन यहां के ग्रामीण कर रहे है। वर्ष के मुख्य तीन त्यौहार होली, दीवाली और हरियाली अमावस्या में यहां नियत तिथि के एक दिन पहले ही त्यौहार मना लिया जाता है।

करीब एक हजार की आबादी वाले ग्राम धनगांव में हर घर दीप जले, आतिशबाजी हुई, गले लगाकर एक दूसरे को पर्व की बधाईयां दी गई। यह सब जब हम आज दीवाली की पूजा करेंगे, लेकिन यह सब धनगांव में एक दिन पहले 19 अक्टूबर रविवार को ही दीवाली का पर्व और लक्ष्मी पूजन कर लिया गया। इस गांव में प्रमुख त्योहारों की खुशियां एक दिन पहले ही मना ली जाती है। स्थानीय लोगों की धारणा है कि ऐसा ना करें तो गांव में विपत्ति आ जाएगी।

बताया गया कि देश भर में जहां आज 20 अक्टूबर को दीपावली पर्व में मां लक्ष्मी का पूजन करेंगे, वहीं ग्राम धनगांव में तय तिथि के एक दिन पहले ही 19 अक्टूबर को दीवाली मनाई गई। सिर्फ इसी साल ही नहीं बल्कि प्रतिवर्ष दिवाली के एक दिन पहले ही दिवाली मना ली जाती है। इसके पीछे ग्रामीणों की अपनी परंपरा और मान्यता है। यहां एक साथ मिलकर ग्रामीण पूजा करते हैं। दीप जलाते हैं और पटाखे फोडऩे के साथ ही सारा गांव मिलकर अपना आदिवासी नृत्य सैला कर खुशियां बांटते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस परंपरा को तोडऩे के कारण पूरे गांव में बीमारियों का प्रकोप फैल जाता है। इसलिए इस गांव के लोग एक दिन पहले त्योहार मनाना उचित समझते हैं। ऐसा नहीं की इससे उनका उत्साह कम होता हो। गांव के ग्रामीण बड़े ही उत्साह के साथ इस दिन का इंतजार करते हैं और सभी मिलकर शाम चार बजे से ही दिवाली का पर्व मनाने लगते हैं। ग्रामीणों के इस त्योहार में कोई भी चीज की कमी नहीं होती। सभी ग्रामीण दीपों के इस पर्व में पहले अपने ग्राम देवताओं की पूजा करते है। इसके बाद खेरमाई के मंदिर में जाकर गांव की खैर मांगी जाती है। फिर घर पर पूजा कर पूरी रात का जागरण भी किया जाता है।

परंपरा का कर रहे निर्वाहन 

गांव के ग्रामीण अपने पूर्वजों की बनाई परंपरा को नहीं तोड़ रहे। ऐसे मे गांव में एक दिन पहले मनाए जाने वाले दीवाली त्यौहार को लेकर ग्रामीणों में वही खुशी नजर आती है जो खुशी अन्य त्यौहार मनाते दूसरे लोगों में होती है। ग्रामीण हरी यादव का कहना है कि गांव मे एक दिन पहले दीवाली मनाने की परंपरा के पीछे गांव के बुजूर्गो की मानता है कि इससे गांव के देव खुश होते है और गांव खुशहाल रहता है। जिसके कारण पूर्वजों ने जो परंपरा बनाई थी, उसे हम नहीं तोड़ सकते हैं।

घर के मुख्य द्वार और गौशाला द्वार में रखते है सेमर की लकड़ी 

नियत तिथि से एक दिन पहले दीवाली मनाने से पहले सुबह से शाम होते होते तक घर के मुख्य द्वार और गौ शाला के द्वार में सेमर की लकड़ी रख दी जाती है। जिसे पार करके कोई भी घर के अंदर और गो शाला में जाता है। यह परंपरा भी बुजूर्गो द्वारा बनाई गई है। इस सेमर की लकड़ी रखने का भी बुजूर्ग बहुत महत्व बताते है।

लोगों में रहा उत्साह 

पर्व को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह दिखने को मिला। दीवाली मनाने के लिये घरों की साफ सफाई, रंग रोगन किया गया। पर्व को मनाने लोग सामूहिक रूप से कार्यक्रम की भी तैयारी की। धनगांव के ग्रामीण उसी चाव और उत्साह से अपनी पहचान आदिवासी लोक नृत्य कर्मा व सैला की तैयारी करने में जुटे रहे। कर्मा और सैला नृत्य आज गांव में बड़े उत्साह के साथ किया जाएगा। गांव में पीढ़ीयों से चली आ रही मान्यता के चलते यहां हर पर्व एक दिन पहले मनाया जाता है।

पूजा के बाद सैला नृत्य की परंपरा

गांव में एक अलग ही पंरपरा है, यहां के रीति रिवाज भी बिल्कुल अलग हैं। यहां ग्रामीण अपने गांव के माता की पूजा करने के बाद शैला नृत्य करते हैं। जिसमें क्या बच्चे क्या बुजुर्ग सभी वर्ग के लोग शामिल होते है। शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा की गई। अब आज जब सब दीवाली मनाएंगे तब यहां के वंशिदे दीवाली के बाद के कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यहां आज सैला नृत्य बड़े उत्साह के साथ दोपहर बाद किया जाएगा।



 

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