धनतेरस पर महासंयोग-ब्रह्म योग और त्रिग्रहीय संयोग में बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
- शुभ योग में बाजार रहेगा गुलजार, बाजारों में होगी रौनक
- आज मनाएंगे धनतेरस पर्व, खरीदारी के लिए दोपहर 3 से 6 बजे तक का समय शुभ
मंडला महावीर न्यूज 29. सनातन धर्मावलंबी इस बार कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि आज शनिवार 18 अक्टूबर को धनतेरस का पर्व मनाएंगे। इस वर्ष ब्रह्म योग, शनि प्रदोष व्रत और त्रिग्रहीय संयोग के कारण इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी, कुबेर, गणेश और धनवंतरि का पूजन किया जाएगा। इस शुभ योग के साथ एक बार फिर जिले का बाजार गुलजार होगा। इसके साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी।
वरदान आश्रम के नीलू महाराज ने बताया कि त्रिग्रहीय संयोग ने धनतेरस पर्व का महत्व बढ़ा दिया है। कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी की शुरुआत आज शनिवार दोपहर 1.22 बजे से होगी। इस दिन ब्रह्म योग और शनि प्रदोष के साथ ही तुला राशि में सूर्य, बुध और मंगल का संचरण होने से त्रिग्रहीय संयोग बन रहा है। तुला राशि व्यापार की प्रतीक है और इसमें जगत की आत्मा सूर्य का संचरण हो रहा है, जो उद्योग, उत्थान और शक्ति के प्रतीक हैं। इन शुभ संयोगों से धनतेरस का महत्व बढ़ गया है।
धनतेरस पर यम दीपदान भी होता है। इस दिन की गई खरीदी को अतिशुभ माना गया है। इस दिन चांदी, पीतल के बर्तन, चांदी के सिक्के, गणेश व लक्ष्मी की प्रतिमाएं खरीदा जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को समुद्र मंथन के दौरान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन धनवंतरि जयंती मनाई जाती है। आयुर्वेद के विद्वान इस दिन धनवंतरि की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करते हैं। इस दिन चांदी के बर्तन की खरीदी को अति शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त में होगी खरीदारी
बताया गया कि आज धनतेरस पर खरीदारी के लिए दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन आभूषण, वस्त्र, वाहन आदि की खरीदारी के अलावा तांबे और पीतल के बर्तन और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं आज के दिन तेल और हल्दी खरीदने से बचना चाहिए। धनतेरस पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बही-खाता बदलने की भी परंपरा है, जिससे वर्ष भर व्यापार में वृद्धि होती है।
13 दीयों का है विशेष महत्व
धनतेरस की शाम घर के अंदर और बाहर दीया जलाने की परंपरा है, जिससे वर्ष भर सुख-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है। इस दिन 13 दीयों का विशेष महत्व है, जिन्हें अलग-अलग स्थानों पर जलाना चाहिए। बताया गया कि आज धनतेरस पर एक दीया यम देवता के निमित्त जलाना चाहिए। एक दीया मां लक्ष्मी के निमित्त। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ दो दीये। तुलसी के पास एक दीया। घर की छत पर एक दीया। शेष सात दीये पीपल के वृक्ष के नीचे और मंदिर में जलाने चाहिए।
यम के निमित्त करें दीपदान
धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिन अज्ञात भय की निवृत्ति व अपघात दोष निवारण के लिए यम के निमित्त दीपदान का विशेष महत्व है। मकान की छत पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल्ली के तेल से यम देवता के निमित्त दीपदान करना चाहिए। इसके साथ ही कुछ कास शास्त्रोक्त उपाय करने से मानव की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और उसको धन-समृद्धि के साथ आरोग्य और एश्वर्य की प्रप्ति होती है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से खुश होती हैं मां लक्ष्मी
धनतेरस के साथ दिवाली के महापर्व की शुरुआत हो जाती। धनतेरस के दिन लोग सोने चांदी के गहने और बर्तन खरीदते हैं लेकिन इस दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा भी काफी लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन झाडू की खरीददारी करने से घर में सुख, शांति और संपन्नता बनी रहती है। मत्स्य पुराण में झाडू को मां लक्ष्मी का ही रूप माना गया है। माना जाता है कि झाडू खरीदने से घर से गरीबी जाती है और ऋण से भी मुक्ति मिलती है।
एक साथ तीन झाड़ू
धनतेरस पर कोशिश करें कि एक साथ तीन झाड़ू खरीदें। इस दिन एक साथ तीन झाडू खरीदने को एक अच्छा शगुन माना जाता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि कभी भी दो या चार के जोड़े में झाड़ू ना खरीदें।
घर में लक्ष्मी का वास होता है
धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदा जाता है। मान्यता है कि इस दिन झाड़ू खरीदने से गरीबी दूर होती है। साथ ही नई झाड़ू से नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदकर अपने घर में लाना चाहिए. इससे पैसों की तंगी को दूर किया जा सकता है। शास्त्रों में इसे माता लक्ष्मी का प्रतिरूप माना जाता है। हालांकि धनतेरस पर झाड़ू खरीदने के कुछ नियमों का भी पालन करना चाहिए। इन नियमों के प्रति लापरवाही बरतने से देवी लक्ष्मी नाराज भी हो सकती है।












