मंडला में ई-अटेंडेंस के विरोध में महारैली, शिक्षकों ने जीपीएस आधारित व्यवस्था को अवैज्ञानिक बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग
- सरकारी स्कूलों की शिक्षा के लिए अभिशाप है ई-अटेंडेंस व्यवस्था
- 17 शिक्षक, कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा
मंडला महावीर न्यूज 29. स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में शिक्षकों के लिए जीपीएस और फेस रिकॉग्निशन पर आधारित ई-अटेंडेंस व्यवस्था को वेतन प्रणाली से जोडऩे के विरोध में जिले में बड़ा आंदोलन छिड़ गया है। 16 कर्मचारी संगठनों ने शिक्षकों के समर्थन में आकर 14 अक्टूबर को एक विशाल महारैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने इस व्यवस्था को अपमानजनक बताते हुए कहा कि वर्तमान में शाला प्रबंधन समिति, पंचायत शिक्षा समिति, जनशिक्षक, संकुल प्राचार्य, बीएसी, बीआरसी सहित डीईओ और अन्य उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यप्रणाली की जांच की जाती है। बावजूद इसके ऑनलाइन उपस्थिति की यह व्यवस्था जबरन थोपी जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

संघों ने ई-अटेंडेंस के अव्यवहारिक होने के कई कारण बताए है। जिसमें बताया कि शिक्षकों की अधिकांश पदस्थापना दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहाँ न आवास की सुविधा है और न ही नेटवर्क की उपलब्धता हर समय रहती है। शिक्षक शैक्षणिक दायित्वों के अतिरिक्त आधार कार्ड, बैंक खाता, समग्र आईडी, अपार आईडी जैसे दर्जनों गैर-शैक्षणिक कार्य भी करते हैं, जिसके लिए उन्हें कोई टीए-डीए नहीं मिलता। ऐसे में शाला खुलने और बंद होने के ठीक समय ई-अटेंडेंस लगाना संभव नहीं है। नेटवर्क और फेस रिकॉग्निशन की समस्याओं के चलते शिक्षक प्रार्थना और प्रथम कालांश छोड़कर मोबाइल से अटेंडेंस लगाने का प्रयास ही करते रहते हैं, जिसका सीधा नुकसान बच्चों की पढ़ाई को होता है। शिक्षकों को ई-अटेंडेंस अपने एंड्रॉइड मोबाइल से लगानी पड़ रही है, जिसके लिए उन्हें कोई मोबाइल भत्ता नहीं दिया जाता है। मोबाइल डिस्चार्ज होने, खराब होने या छूट जाने की स्थिति में अटेंडेंस लगाना असंभव होगा।
शिक्षा गुणवत्ता के लिए अभिशाप
संगठनों ने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षा गुणवत्ता के लिए अभिशाप है, क्योंकि यह केवल स्कूल खुलने और बंद होने के समय शिक्षक की उपस्थिति पर नजर रख सकती है, बीच में अध्यापन पर नहीं। उन्होंने आयुक्त लोक शिक्षण के उस पत्र का भी हवाला दिया कि ई-अटेंडेंस लगाने वाले विद्यालयों का बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के निरीक्षण नहीं किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने पढ़ाई-लिखाई से अधिक उपस्थिति को महत्व दिया है। ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा कि यह व्यवस्था किसी भी प्रकार से व्यवहारिक नहीं है, इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग चाहे तो बायोमेट्रिक मशीन के द्वारा अटैन्डेंस व्यवस्था लागू कर सकता है, जिस पर शिक्षकों को कोई आपत्ति नहीं होगी। इस विरोध में ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन, एनएमओपीएस संगठन, अपाक्स संघ, अजाक्स संघ, मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, पटवारी संघ और वन विभाग कर्मचारी संघ सहित कुल 17 संगठनों ने अपना समर्थन देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।










