जनप्रतिनिधि का अनोखा विरोध, विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

जनप्रतिनिधि का अनोखा विरोध, विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

  • जिला पंचायत सदस्य ने आम नागरिक बन दिया आवेदन
  • जब हमारी नहीं सुनते अधिकारी, तो जनता का क्या होगा

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में उस वक्त एक अप्रत्याशित दृश्य देखने को मिला, जब जिला पंचायत सदस्य और सहकारिता एवं उद्योग विभाग की सभापति ललिता धुर्वे अपनी समस्याओं को लेकर एक आम नागरिक की तरह आवेदन देने पहुंचीं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि के पत्रों और शिकायतों का जवाब अधिकारी नहीं देते, तो आम नागरिक की सुनवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

ललिता धुर्वे ने बताया कि वह लंबे समय से अपने विभाग से संबंधित कार्यों की समीक्षा के लिए अधिकारियों से लिखित जानकारी मांग रही हैं लेकिन अधिकारी उनके पत्रों का जवाब देने से बचते हैं और केवल मौखिक रूप से भ्रामक सूचनाएं देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लिखित जवाब मांगने पर अधिकारी टालमटोल करने लगते हैं, जिससे विभाग में पारदर्शिता का घोर अभाव स्पष्ट नजर आ रहा है।

गंभीर वित्तीय घोटालों पर कार्रवाई नहीं 

ललिता धुर्वे ने विशेष रूप से उद्योग विभाग के अधिकारियों पर गैर-जवाबदेही का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने अल्प बचत सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक में हुए बड़े वित्तीय घोटालों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बार-बार पत्राचार करने के बावजूद अब तक कोई जांच या ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस बैंक के अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर होते हैं, ऐसे में प्रशासनिक जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है।

जनता का भरोसा उठना स्वाभाविक 

ललिता धुर्वे ने कहा कि यदि विभाग के प्रमुख अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर ऐसी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो जनता का सरकारी व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि होने के बावजूद यदि मुझे आवेदन देने और जवाब के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है। जनसुनवाई में उपस्थित नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर सहमति जताई। ललिता धुर्वे ने प्रशासन से आग्रह किया है कि विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और सहकारिता एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों के कार्यों की निष्पक्ष जांच की जाए, जिससे जनता और प्रतिनिधियों दोनों का विश्वास बहाल हो सके।



 

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