आदिवासी महिलाएं रच रहीं परंपरा और रंगों का संगम
- दीपावली पर मंडला में गौड़ी कला का महासंगम, प्रदेश स्तर में छाएगा गौड़ी चित्रकारी का जादू
- 10 से 1200 रूपए तक गौड़ी चित्रकारी से सजे दीये और कलश बाजार में उपलब्ध
- आत्मनिर्भर बन रहीं 30 आदिवासी महिलाएं
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इस दीपावली पर पारंपरिक कला और पर्व का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यहां ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान द्वारा गौड़ी चित्रकारी के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहल की है। अब इस पहल से आदिवासी महिलाएं अपनी सदियों पुरानी गौड़ी चित्रकारी को मिट्टी के उत्पादों और सजावटी वस्तुओं पर उकेर कर त्यौहार की रौनक बढ़ा रही हैं। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ इनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही है।
जानकारी अनुसार गौड़ी चित्रकारी से अब आदिवासी महिलाओं की कलात्मक प्रतिभा उभर कर सामने आ रही है। अब हर तीज, त्यौहार में महिलाएं इस गौड़ी चित्रकारी से लोगों के लिए कुछ नया बनाने का प्रयास कर रही है। इस दीवाली पर मंडला की स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर लाने का प्रयास संस्थान और स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के उत्थान और पारंपरिक कला के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।
30 आदिवासी महिलाएं हो रही तैयार
संस्थान के डॉयरेक्टर रामकुमार सिंगौर ने बताया कि इस गौड़ी चित्रकारी को आगे बढ़ाने में हथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय भोपाल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला पंचायत मंडला के सहयोग से जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा एवं सीईओ शाश्वत सिंह मीना के मार्गदर्शन में ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान द्वारा संचालित की जा रही है। मंडला जिले के इंद्री सेक्टर में गौड़ी चित्रकारी के गुर सिखाने विगत सितंबर माह से प्रशिक्षण दिया जा रहा था, जो 10 अक्टूबर तक दिया गया। इस प्रशिक्षण में क्षेत्र की 30 आदिवासी महिलाएं सक्रिय रूप से भाग लेकर अपनी कला में निखार लाई। ये महिलाएं गौड़ी चित्रकारी के माध्यम से मिट्टी के दीये, कलश, पूजा थाली, पोस्टकार्ड, की-रिंग, पेपर वेट और अन्य सजावटी वस्तुएं तैयार कर रही हैं।
गौड़ी चित्रकला करा रही परंपरा और आस्था से रूबरू
गौड़ी चित्रकारी मंडला जिले की सांस्कृतिक पहचान है। यह कला शैली गौंड जनजाति के जीवन-दर्शन, आस्था और प्रकृति के गहरे जुड़ाव से रूबरू कराती है। प्रशिक्षण के दौरान जागृति उईके, निकिता उलारी, बरखा उलारी, प्रीति धुर्वे, वंदना तेकाम, सुमन मरावी, रेखा उसराठे, सुरेखा मीना और ज्योति मर्सकोल जैसी स्थानीय महिलाएं अपने हाथों से परंपरा और सृजन का सुंदर चित्रकारी प्रस्तुत कर रही हैं। इन महिलाओं के उत्पाद न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि उनके कौशल और स्वावलंबन की कहानी भी बयां कर रही है।
मंडला की गौड़ी चित्रकारी का जलबा प्रदेश में
दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुये मिट्टी के दीपक एवं गोबर के दीपक में गौड़ी चित्रकारी की जा रही है जो कि बहुत रंग बिरंगी एवं मनभावन है। इसके अलावा गोबर के लक्ष्मी गणेश, ओम श्री स्वास्तिक बनाया जा रहा है। ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान के डॉयरेक्टर रामकुमार सिंगौर ने बताया कि 07 से 16 अक्टूबर तक भोपाल में ओजस्वनी महोत्सव मेला आयोजित किया गया है। इस महोत्सव मेला में ग्राम सुरखी से जागृति उईके, ज्योति भावरें गई हुई है। वहां पर मिट्टी के दीपक, गोबर के दीपक, लक्ष्मी गणेश, पान गणेश, हेण्डमेड पेपर केनवास की रिंग, फ्रिज मेगनेट, पेपरवेट, बुक मार्क, दुपट्टा, टी शर्ट, रूमाल, बैग लेडीस सूट विक्रय के लिये ले एक्जीवेशन में रखे गए है। इसके अलावा संस्थान द्वारा मंडला जिला मुख्यालय में रेडक्रॉस के पास गोड़ी चित्रकारी से बने दीपक विक्रय के लिए रखे जाएंगे। इससे महिलाओं का उत्साह बढ़ेगा और मार्केटिंग करने का अनुभव भी होगा। यहां होने वाली इनकम से इनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
कलात्मक उत्पाद विक्रय के लिए उपलब्ध
दीपावली को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे गौड़ी चित्रों से सजे दीये, पूजा थालियां और कलश न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि इन महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक प्रेरक कदम भी हैं। दीपावली के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए ये कलात्मक उत्पाद अब विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं द्वारा बनाई की कलात्मक सामग्री में हैंडमेड पेपर 900 रूपए, कैनवास 1200 रूपए, की-रिंग 90 रूपए, दीपक 10 रूपए, पेपर वेट 50 रूपए, रूमाल 100 रूपए, पोस्टकार्ड 40 रूपए ये सभी वस्तुएं विक्रय के लिए उपलब्ध हैं।
इनका कहना है
गौड़ी चित्रकारी हमारी सांस्कृतिक पहचान है। पहले हम इसे सिर्फ दीवारों पर बनाते थे, लेकिन अब दीयों और कलशों पर इसे देखकर बहुत खुशी होती है। त्योहार के साथ हमारी कला भी चमक रही है।
इस काम से हमें अच्छी आय हो रही है। अब हम किसी पर निर्भर नहीं हैं। दीपावली पर अपने हाथों से बनाए गए सामान से पैसा कमाना सचमुच आत्मनिर्भर बनने जैसा महसूस होता है।
प्रशासन के सहयोग से यह प्रशिक्षण मिला। हमें उम्मीद है कि हमारे उत्पाद दूर-दूर तक जाएंगे और हमारी कला को एक नई पहचान मिलेगी। हमें अब कला को आगे बढ़ाने का हौसला मिला है।
इस वर्ष दीपावली के त्योहारी में हम मिट्टी के दीपक में गोड़ी चित्रकारी बनाकर विक्रय करेंगे, ये दीपक बहुत ही खुबसूरत है और इसकी मांग अधिक है। अभी दो दीदियॉं ओजस्वनी महोत्सव भोपाल एग्जीविशन में दीपक लेकर गई हैं।
दीपावली पर्व को देखते हुए इंद्री सेक्टर में करीब 30 महिलाओं को गौड़ी चित्रकारी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं मिट्टी और गोबर के दीपक बना रही है, इन दीपक को आकर्षक बनाने के लिए इनके द्वारा इसमें गौड़ी चित्रकारी भी की जा रही है।

रामकुमार सिंगौर, डॉयरेक्टर
ग्रामीण विकास एवं महिला उत्थान संस्थान, मंडला



















