शरद पूर्णिमा पर 10 विद्या महाशक्ति पीठ के विसर्जन चल समारोह में उमड़ा जनसैलाब
- भव्य आतिशबाजी और छत्तीसगढ़ की महाकाली झांकी
- दस महाविद्या स्वरूपों वाली विद्या महाशक्ति पीठ का विसर्जन, संगीत से मंत्रमुग्ध हुए धर्मप्रेमी
मंडला महावीर न्यूज 29. हर वर्ष की तरह इस बार भी श्री सिद्ध सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति बड़ी खैरी द्वारा स्थापित विद्या महाशक्ति पीठ का भव्य विसर्जन चल समारोह शरद पूर्णिमा के पावन दिवस पर बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और अभूतपूर्व भव्यता के साथ निकाला गया। यह चल समारोह शक्ति, भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम बना, जिसमें हजारों की संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु शामिल हुए।
बड़ी खैरी से आरंभ हुआ यह भव्य चल समारोह दोपहर 12 बजे विद्या महाशक्ति पीठ से शुरू हुआ। विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद माता की प्रतिमा को सुसज्जित रथ पर विराजित कर नगर के मुख्य मार्गों से भ्रमण कराया गया। जुलूस जैसे ही पड़ाव चिलमन चौंक, बस स्टैंड, लालीपुर, बैगा-बैगी चौंक से होते हुए रेडक्रॉस, बड चौराहा और उदय चौंक पहुंचा, सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे मार्ग में भक्तों ने फूल बरसाकर माता का स्वागत किया। अंतत: यह विशाल चल समारोह विसर्जन स्थल नावघाट पहुंचा, जहां विधि-विधान से पूजन अर्चन करते हुए मातारानी का विसर्जन किया गया।
झांकियों और संगीत की स्वर लहरियों से गूंजा नगर
विसर्जन चल समारोह इस बार अपने सांस्कृतिक आकर्षणों के कारण अविस्मरणीय बन गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ से आई अखंड महाकाली झांकी रही, जो अपने 80 साथियों के साथ यहां पहुंची थी। झांकी में प्रस्तुत किए गए देवी स्वरूपों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत और वाद्य यंत्रों ने पूरे नगर को भक्तिमय उत्साह से भर दिया। मशहूर सुनील ब्रश बैंड अपने 70 कलाकारों के साथ मनमोहक देवी गीतों को प्रस्तुत करते नजर आए। वहीं नागपुर से आए जेबी ढोल की थाप ने नगर को गुंजायमान कर दिया। ध्वनि की भव्यता में किशन डीजे का 40 हजार वॉट साउंड सिस्टम भी शामिल था, जिसने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही भूतनाथ शंकर की चलित झांकी लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसके साथ भक्त सेल्फी और तस्वीरें लेते नजर आए।
आतिशबाजी और रंगोली रही आकर्षण का केन्द्र
विसर्जन मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धा और कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। मुंबई से आए रंगोली कलाकारों ने अपनी मनमोहक कलाकृतियों से स्वागत द्वार सजाए, जो श्रद्धालुओं को कला के प्रति आकर्षित कर रहे थे। वहीं, अरिहंत इवेंट द्वारा पूरे मार्ग पर की गई भव्य आतिशबाजी ने आसमान को रोशनी से भर दिया, जिससे रात का दृश्य अलौकिक हो गया। समिति के अध्यक्षों एवं सदस्यों ने बताया कि यह चल समारोह माँ के प्रति अटूट भक्ति और संपूर्ण समाज की एकता का प्रतीक है। माता के दर्शन और विसर्जन में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने पूरे हर्षोल्लास के साथ सहभागिता की।
दस महाविद्या स्वरूपों का केंद्र
इस वर्ष विद्या महाशक्ति पीठ में मां के दस दिव्य स्वरूपों की स्थापना की गई थी, जिनके दर्शन के लिए पूरे नवरात्रि के दौरान भक्तों का तांता लगा रहा। ये दस स्वरूप मां धूमावती, मां कमला, मां काली, मां बगलामुखी, मां मातंगी, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां षोडशी और मां छिन्नमस्ता का था। बताया गया कि विद्या महाशक्ति पीठ को उन देवियों में एक माना जाता है जो समस्त शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं। यह पीठ मां के दस दिव्य स्वरूपों का प्रतीक है, जहां मां के रूप में शक्ति, ज्ञान, समृद्धि, करुणा और न्याय का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। माना जाता है कि यहां की आराधना करने से साधक को न केवल सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक शांति और सिद्धि भी प्राप्त होती है। बड़ी खैरी का यह दुर्गोत्सव शारद पूर्णिमा पर अपने चरम पर पहुंचा, और यह स्थान भक्तों के लिए आस्था, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।











