वार्ड बॉय के भरोसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, खतरे में ग्रामीणों की जान

वार्ड बॉय के भरोसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, खतरे में ग्रामीणों की जान

  • एनक्यूएएस प्रमाण पत्र वाला समनापुर अस्पताल बदहाल, चिकित्सक नदारद
  • इलाज नहीं मिलने से वापस लौट रहे मरीज

मंडला महावीर न्यूज 29. बीजाडांडी जनपद के अंतर्गत आने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समनापुर में अव्यवस्था और चिकित्सक की मनमानी के कारण लगभग 20 आदिवासी बाहुल्य गांवों के ग्रामीणों का इलाज प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि केंद्र पर तैनात डॉक्टर आए दिन नदारद रहते हैं, जिसके चलते पूरा अस्पताल नर्सों और वार्ड बॉय के सहारे चल रहा है।

जानकारी अनुसार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं अब भगवान भरोसे है। जिले के कई स्वास्थ्य केन्द्रों में मनमानी के चलते ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। बताया गया कि बीजाडांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का पीएचसी समनापुर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक का राष्ट्रीय प्रमाणन पत्र मिल चुका है। जिसके बाद इस स्वास्थ्य केन्द्र में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सके। इस स्वास्थ्य केन्द्र में भी दूर दूर से ग्रामीण अपना इलाज कराने पहुंचते है। पर्याप्त स्टाफ और संसाधन के होने के बावजूद चिकित्सक के इंतजार में कई मरीज बिना इलाज के ही यहां वापस लौटने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय चिकित्सकों की लापरवाही के कारण ही ये बीमार लोग झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में फंस रहे हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बढ़ रहा है।

मौसम बदलने पर भी दवाईयों का टोटा 

वर्तमान में मौसम में बदलाव के कारण हर घर में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज हैं। इसके साथ ही दूषित पानी की वजह से पेट संबंधी रोगों के रोगी भी बड़ी संख्या में केंद्र पहुंच रहे हैं। गंभीर स्थिति तब बन जाती है, जब लोगों को रोग से संबंधित दवाईयां तक उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि अस्पताल में दवाईयों का टोटा हमेशा बना रहता है।

उत्कृष्टता प्रमाण पत्र महज दिखावा 

ग्रामीणों ने बताया कि विगत माह बीजाडांडी बीएमओ और पूरे स्टाफ ने समनापुर आरोग्य केंद्र का कायाकल्प किया था। अस्पताल को चमकाकर सब कुछ साफ सुथरा दिखाने के लिए यह डेंटिंग-पेंटिंग की गई थी, जिसके आधार पर केंद्र को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण पत्र भी मिल गया। अस्पताल में एक बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें लिखा है, मैं यहाँ पर स्वस्थ होने आया हूँ। हालांकि जमीनी हकीकत इस प्रमाण पत्र और संदेश से बिल्कुल उलटी है। मरीजों को घंटों इंतजार कराया जाता है और बीमार व्यक्ति इलाज के लिए एक काउंटर से दूसरे काउंटर भटकता रहता है, फिर भी उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाता है।

लापरवाह स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की मांग 

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इस तरह से मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले डॉक्टर और लापरवाह स्टाफ के ऊपर सख्त कार्यवाही की जाए और केंद्र पर पर्याप्त दवाईयों एवं स्टाफ की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इनका कहना है

हम अस्पताल इलाज कराने आए थे, लेकिन यहां डॉक्टर नहीं मिले। समनापुर स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर समय पर नहीं मिलते है, जिसके कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। आज भी डॉक्टर नहीं मिले।


कढ़ोरी यादव

मेरी तबीयत खराब थी, इलाज कराने आए थे, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं मिले, एक घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टर साबह नहीं आए और ना ही दवाई दी गई।


राजू लाल मरावी



 

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