कान्हा की खामोश दहाड़, 2025 में अब तक 10 बाघों की मौत

कान्हा की खामोश दहाड़, 2025 में अब तक 10 बाघों की मौत

  • वर्चस्व की लड़ाई में तीन बाघों की रहस्यमयी मौत
  • प्रबंधन की साख पर प्रश्नचिन्ह, टाइगर स्टेट की साख दांव पर
  • कान्हा में एक ही दिन तीन बाघों ने तोड़ा दम

मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण की साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कान्हा पार्क खुलने के बाद अक्टूबर 2025 के शुरुआती दिनों में एक ही दिन में एक नर बाघ और दो मादा शावकों की रहस्यमयी मौत ने जंगल की शांति को भय में बदल दिया है। विशेषज्ञ इसे प्रबंधन की लापरवाही और कमजोर निगरानी का नतीजा मान रहे हैं, जबकि स्थानीय गाइड और वनप्रेमी प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व जो बाघों की गर्जना और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, इन दिनों मौतों के सिलसिले से सन्नाटे में डूबा है।

जानकारी अनुसार तीन बाघों की मौत की घटना में पहली घटना कान्हा परिक्षेत्र के मुण्डीदादर बीट के कक्ष क्रमांक 119 में प्रकाश में आई, जहाँ लगभग 1 से 2 माह उम्र के दो मादा बाघ शावकों की मृत्यु हुई। स्थानीय गश्ती दल ने शावकों के शवों के पास एक नर बाघ को घूमते देखा था, जिससे उनकी मौत आपसी संघर्ष में होना मानी जा रही है। वहीं दूसरी घटना उसी दिन मुक्की परिक्षेत्र के अंतर्गत मवाला बीट के कक्ष क्रमांक 164 में हुई। इस घटना में स्थानीय हाथी गश्ती दल ने प्रत्यक्ष रूप से दो नर बाघों के बीच खूनी संघर्ष होते देखा, जिसके कारण एक वयस्क नर बाघ की गंभीर रूप से घायल होकर मौत हो गई। बताया गया कि बाघों की बढ़ती संख्या के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए इस तरह की घटनाएँ जंगल में स्वाभाविक हैं।

4 साल में दो दर्जन बाघों ने तोड़ा दम 

बाघों की लगातार मौतें कान्हा के लिए अच्छा संकेत नहीं है। बताया गया कि पिछले 4 साल में करीब दो दर्जन बाघों ने दम तोड़ा है, जिनमें सिर्फ 2025 में ही 10 बाघों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का सबसे प्रमुख कारण आपसी भिड़ंत, प्राकृतिक संघर्ष और वयस्क नर बाघों द्वारा शावकों की हत्या जैसी घटनाएं हैं। वहीं मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का श्रेय दिलाने में कान्हा का बहुत बड़ा योगदान है।

प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल 

अक्टूबर के पहले सप्ताह में हुई तीन मौतों ने वन प्रबंधन की कमजोरी उजागर कर दी है। राष्ट्रीय टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी का क्विक रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल मौजूद होने के बावजूद इन घटनाओं को रोकना संभव नहीं हो सका, जिससे निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय गाइड, सामाजिक संगठन और वन्यजीव प्रेमियों ने मांग की है कि इन मौतों की उच्च स्तरीय जांच की जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और सभी घटनाओं की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जिला कलेक्टर व राज्य मुख्यालय को भेजे जाएं। वन्यजीव विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह सिलसिला जल्द नहीं रुका, तो कान्हा जैसा विश्वप्रसिद्ध रिजर्व अपनी बाघ संरक्षण की पहचान खो सकता है।



 

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