महाशिवपुराण कथा-आस्था, नृत्य और दिव्य ज्ञान का अमृत उत्सव

महाशिवपुराण कथा-आस्था, नृत्य और दिव्य ज्ञान का अमृत उत्सव

  • महाशिवपुराण में नर्मदा और गंगा के अवतरण की कथा से श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

मंडला महावीर न्यूज 29. दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित महाशिवपुराण कथा का आठवां दिवस भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष दिन नर्मदा और गंगा के जन्म का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। संगीत की मधुर धुन पर मातृशक्ति और पुरुषों ने नृत्य किया, जिससे पंडाल का माहौल भक्तिमय और मन-मुग्ध कर देने वाला हो गया।

पंडित पवन शास्त्री महाराज ने कथा के दौरान भगवान सूर्य और हनुमान जी के बीच के गुरु-शिष्य संबंध का विस्तृत वर्णन किया। बताया गया कि सूर्य भगवान ने हनुमान जी को चार विद्याएं प्रदान की थीं, लेकिन पाँचवीं विद्या के लिए उन्होंने विवाह को अनिवार्य बताया। गुरु के मार्गदर्शन पर हनुमान जी ने सूर्य भगवान की पुत्री सुवर्चला से विवाह किया और विवाह के बाद उन्हें शेष विद्या भी प्राप्त हो गई, जिससे उन्हें कुल नौ विद्याओं का ज्ञान प्राप्त हुआ। कथा में बताया गया कि हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर केवल तेलंगाना प्रदेश में ही देखा जाता है।

मोहिनी स्वरूप और महिषासुर का वध 

कथा में महिषासुर और अलमासुर के वध का भी वर्णन हुआ, जिसके लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। मोहिनी के आकर्षक स्वरूप को देखकर भगवान शंकर से जो तेज उत्पन्न हुआ, उसे सप्त ऋषियों ने एक पात्र में लेकर स्थापित किया। महाशिवपुराण कथा की समाप्ति पर महाप्रसाद का वितरण किया गया। दुर्गा उत्सव समिति के युवाओं ने इस पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग किया। क्षेत्र के धर्मप्रेमियों ने इस धार्मिक आयोजन को आस्था और विश्वास का अमृत उत्सव बताया और समिति के प्रयासों की सराहना की।


 

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