देवीमय हुआ शहर, भक्ति में डूबे श्रृद्धालु

नवरात्र का चौथा दिन

  • देवीमय हुआ शहर, भक्ति में डूबे श्रृद्धालु
  • आज होगी स्कंद माता की पूजा

मंडला महावीर न्यूज 29. नवरात्र के चलते पूरा शहर देवीमय हो गया है। जिस गली से गुजरो केवल माता के जयकारे ही सुनाई दे रहे है। जैसे जैसे दिन ढलता है देवी के जयकारे जोर शोर से सुनाई देने लगते है। देवी पंडालो में आकर्षक विद्युत साज सज्जा देखते ही बनती है। सुर मधूर देवी गीत मन को मोह लेते है। माता की सुबह की आरती दुर्गा सप्तशती के पाठ वातावरण में भक्ति का रंग श्रृद्धा भाव के साथ श्रृद्धालुओं में भर देते है तो शाम की आरती कई गुना जोश व समर्पण माता के श्री चरणों में भक्त समर्पित करता है। शहर की सड़के रात्रि में धीरे धीरे माता के भक्तों से भरने लगी है। भक्त माता की मनोहारी छवि को पाने के लिए उत्सुक हो रहे है।

सुबह से वातावरण में माता की भक्ति का रंग अन्य दिनों की अपेछा गहरा लगा क्योंकि सुबह की शुरूआत पंडालों मदिरों में मधुर देवी गीतों के साथ हुई। जिसके बाद माता की आरती, दुर्गा सप्तसती के पाठ हुए। दिन भर पंडालों मदिरों में साज सज्जा को अंतिम रूप दिया गया। वहीं मदिरों पडांलों में देवी जस गीत के आयोजन हो रहे है। रात्रि आरती के बाद कही गरबा तो कहीं जागरण की तैयारियां चल रही है। शहर के मुख्य देवालयों देवी मदिरों में कलश जवारे रखे गए है।

गाजे बाजे के साथ हो रही आरती 

प्रतिदिन रात्रि में पंडालों में आरती आकर्षण का केन्द्र होती है। एक ही समय में लगभग सभी पंडालों में देवी की आरती की जाती है। जिस गली से गुजरो उस गली में पंडालों में आरती की गूंज सुनाई देती है। गाजे बाजे व ढोलक, मंजीरा के साथ आरती में भक्त झूमने लगते है।

आज होगी स्कंद माता की पूजा 

पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली स्कंदमाता नवरात्रि में पांचवे दिन इस देवी की पूजा अर्चना की जाती है। इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित है। इस देवी की चार भुजाएं है। ये दाई तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए है। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाई तरफ वाली भुजा में वरद मुद्रा में है और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती है। इसलिए इन्हें पद्यासना भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।



 

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