सड़क, पानी, मुक्तिधाम के लिए आंदोलन की तैयारी
- ग्रामीणों की परेशानी-सड़क, पानी, मुक्तिधाम
- पहले भी कर चुके चुनाव बहिकार, परेशान हो रहे ग्रामीण
- इमलिया गांव में नल-जल योजना अधूरी, ग्रामीण दूषित पानी पीने मजबूरी
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिले के विकासखंड बिछिया की ग्राम पंचायत इमलिया के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। लगभग 1000 की आबादी वाले इस गांव में दो वर्ष पूर्व नल-जल योजना के तहत पाइप लाइन तो बिछाई गई, लेकिन घर-घर नल कनेक्शन लगाने का काम अधर में छोड़ दिया गया। नतीजतन ग्रामीण आज भी दूषित पानी छानकर पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नहर, झिरिया और कुएं का पानी ही उनकी प्यास बुझाने का सहारा है। साफ पेयजल की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आती हैं। उपसरपंच बलराम यादव ने बताया कि विभाग की लापरवाही के चलते अधूरी पड़ी इस योजना का लाभ आज तक किसी को नहीं मिला है।
आवेदन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
गांव की समस्याओं को लेकर ग्रामीणजन स्थानीय स्तर से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक कई बार गुहार लगा चुके हैं। अब तक लगभग चार से अधिक बार कलेक्ट्रेट पहुंचकर आवेदन सौंपा गया, मगर हर बार आश्वासन के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उपसरपंच बलराम यादव व ग्रामीणजनों ने पेयजल, सड़क और मुक्तिधाम की समस्या को लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द ग्राम इमलिया की समस्या का समाधान कराया जाए। जिससे ग्रामीणों को परेशानी से निजात मिल सके।
सड़क और मुक्तिधाम का भी अभाव
ग्रामीणों को पानी के साथ-साथ सड़क की सुविधा से भी वंचित रहना पड़ रहा है। गांव तक पहुंचने का पक्का मार्ग न होने से लोग पगडंडी के रास्ते सफर करने को मजबूर हैं। इसके अलावा गांव में मुक्तिधाम भी नहीं है। पूर्व उपसरपंच रियाज अली ने बताया कि किसी की मृत्यु होने पर ग्रामीणों को निजी भूमि या खेतों में दाह संस्कार करना पड़ता है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आक्रोश के बाद पहुंचा था स्थानीय प्रशासन, स्थिति जस की तस
ग्राम पंचायत इमलिया के ग्रामीण मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट आते है कि उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा, लेकिन इमलिया ग्राम के लोगों की समस्या का समाधान जनसुनवाई में नहीं हो पा रहा है। विगत जून माह में भी ग्रामीणों और महिलाएं खाली मटके लेकर मंडला कलेक्टर के पास पहुंचे थे, जिसके बाद उनकी समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की सुनी और तत्काल संबंधित अधिकारियों को समस्या के निदान के निर्देश दिए। महिलाओं व ग्राम वासियों को आश्वासन दिया कि जल्द ही ट्यूबवेल कराकर उनकी पेयजल समस्या का हल किया जाएगा। इस दौरान नायब तहसीलदार अंजनिया पटवारी कुलदीप कछवाहा, एसडीओ पीएचई श्री उइके, जनप्रतिनिधि उपसरपंच बलराम यादव और ग्रामीण स्वरूप दास मोंगरे, मिलन सोनवानी सहित ग्राम की महिलाएं मौजूद रहे। तीन माह बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक समस्या निराकरण के लिए आगे कोई पहल नहीं की गई। समस्या जस की तस बनी हुई है।
चुनाव का किया था बहिष्कार
मंडला जिले के जनपद पंचायत बिछिया अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलिया माल, इमलिया रैयत, डूंगरिया में आजादी के बाद से आज तक ग्राम वासियों ने सड़क नहीं देखी और ना ही इन गांवों को मुख्य मार्ग के प्रधानमंत्री सड़क योजना से जोड़ा गया। सड़क समेत अन्य मूलभूत समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार समस्या निराकरण की मांग की, लेकिन यहां की समस्या का निदान नहीं हो सका। जिससे आक्रोशित होकर यहां के ग्रमीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। ग्राम पंचायत इमलिया माल, इमलिया रैयत और डूंगरिया के मतदाताओं ने गांव में सड़क की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। इन तीन ग्रामों में 1263 मतदाताओं में से सिर्फ 31 वोट ही डाले गए थे। इन 31 वोट में 11 वोट शासकीय मतदाताओं के और शेष 20 वोट अन्य लोगों के थे।
समस्या निराकरण नहीं होने पर किया जाएगा उग्र आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में कई बार ग्राम की मूलभूत समस्या को लेकर मंडला कलेक्टर को आवेदन, निवेदन किया जा चुका है। जिसके बाद यहां के बोर में मोटर तो लगा दी गई लेकिन अभी भी यहां के नलों में पानी की जगह हवा निकल रही है। ग्रामीणों की मूलभूत समस्या की तरफ स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रैंग रही है। इन सब परेशानियों को देखते हुए ग्राम इमलिया के ग्रामीणों ने पुन: प्रशासन को जगाते हुए कहां कि जल्द ही पानी, सड़क और मुक्तिधाम की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्राम पंचायत इमलिया के ग्रामीण उग्र आंदोलन करने मजबूर होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन, प्रशासन की होगी।
इनका कहना है
वर्षो से ग्राम इमलिया में ग्रामीणों और हमारे बच्चों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में कुएं और नहर का गंदा पानी पीना पड़ता है। कई बार बच्चों को पेट दर्द और बीमारी हो जाती है, लेकिन प्रशासन हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा, अनेको बार आवेदन, निवेदन कर चुके है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
गांव में आज तक मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हुआ है। किसी की मृत्यु होने पर हमें मजबूरी में खेत या निजी जमीन पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इससे कई तरह की सामाजिक और धार्मिक कठिनाइयाँ सामने आती हैं। हमने बार-बार मांग की, लेकिन हमारी इस मूलभूत समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है।
गांव में सड़क नहीं होने से बरसात में बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। अस्पताल जाने वाले मरीज तक समय पर नहीं पहुंच पाते। हमने कई बार अधिकारियों से कहा, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हम ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं है। शिकायत देकर हम थक चुके है।
हमारे ग्राम अंतिम संस्कार के लिए जगह न होने से हमें बहुत शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। बारिश के दिनों में तो हालात और खराब भी हो जाते हैं। प्रशासन अगर तुरंत मुक्तिधाम का निर्माण करा दे तो पूरे गांव को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं बारिश महिने में ग्रामीणों को वनवास काटना पड़ता है।















