कुपोषण के खिलाफ जंग, एक साल चार महीने की राधिका ने जीती बाजी

कुपोषण के खिलाफ जंग, एक साल चार महीने की राधिका ने जीती बाजी

  • पोषण पुनर्वास केंद्र में राधिका का सफल उपचार, कुपोषण से मिली मुक्ति

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती एक साल चार महीने की बच्ची राधिका भारतिया ने गंभीर कुपोषण को हराकर एक नई जिंदगी पाई है। राधिका मंडला जिले के मुगली गांव निवासी हैं। राधिका को 27 अगस्त को जिला अस्पताल मंडला में इलाज के लिए लाया गया था। जहां प्रारंभिक जांच में राधिका को अति कुपोषण के साथ निमोनिया और तेज बुखार भी पाया गया, जिसके बाद उसे तुरंत पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती किया गया। उसकी हालत में सुधार होने पर उसे अगले दिन पोषण पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया।

बताया गया कि एनआरसी में भर्ती होने के समय राधिका का वजन सिर्फ 3 किलो 400 ग्राम और लंबाई 59 सेंटीमीटर थी। कम वजन के कारण वह अति कुपोषण की श्रेणी में आ रही थी। एनआरसी में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश ठाकुर और एनआरसी प्रभारी की देखरेख में उसका उपचार शुरू किया गया। सभी आवश्यक जांचों के बाद सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के मार्गदर्शन में उसे सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया।

बताया गया कि राधिका केंद्र में कुल 14 दिनों तक भर्ती रही। इस दौरान उसका वजन बढ़कर 4 किलो 135 ग्राम हो गया। केंद्र के नर्सिंग स्टाफ इंदु जंघेला, रोशनी मेरावी, प्रियंका पटेल, प्रीति जंघेला, शिल्पा पटेल और दुर्गा जंघेला शामिल ने राधिका और उसकी मां की विशेष देखभाल की। इसके साथ ही सहायक स्टाफ संजना चौरसिया, रामबाबू साहू, धानीराम तेकाम, और महेश्वरी ने राधिका की मां को रोजाना सलाह दी कि घर पर बच्चे को कैसे पौष्टिक आहार देना है, जिससे वह दोबारा इस स्थिति में न आए।

बताया गया कि पोषण पुनर्वास केंद्र द्वारा राधिका की मां को मजदूरी भत्ते के रूप में 1680 रुपये भी दिए जाएंगे। डिस्चार्ज के समय राधिका पूरी तरह से स्वस्थ थी। उसे 15 दिनों के बाद फॉलो-अप के लिए फिर से आने की सलाह दी गई है।



 

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