चुनाव में सिर्फ वादे, हकीकत में पैदल चलना भी मुश्किल

चुनाव में सिर्फ वादे, हकीकत में पैदल चलना भी मुश्किल

  • आजादी के 75 साल बाद भी मंडला के रैयत पिंडरई में मार्ग नहीं, ग्रामीण परेशान

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के नारायणगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत पिंडरई माल के ग्राम रैयत पिंडरई बारा टोला के निवासियों को आज भी आजादी के 75 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या गांव तक पहुंचने के लिए एक रास्ते की कमी है, जिसके कारण ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों की मांग है कि नदी और बाढ़ वाले स्थान पर एक पुलिया का निर्माण किया जाए, जिससे बच्चों और आम जनता को आवागमन में आसानी हो सके। इस समस्या का समाधान न होने से स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।

बताया गया कि ग्राम रैयत पिंडरई नारायणगंज से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यहां के निवासियों का कहना है कि वे हर साल अपनी इस समस्या को ग्राम सभा से लेकर स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाते रहे हैं। पूर्व विधायक रामप्यारे कुलस्ते से लेकर वर्तमान विधायक चेन सिंह वरकड़े और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते तक सभी को मौखिक और लिखित रूप में इस समस्या से अवगत कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में नेता बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

जान जोखिम में डालकर पार करनी पड़ती है नदी

ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें एक नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में जब नदी उफान पर होती है, तो इसे पार करना जानलेवा हो सकता है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी बढ़ जाता है। इस साल की भारी बारिश ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है। किसानों ने अपनी मेढ़ों पर सीमेंट और रेत से अस्थायी दीवार बनाई थी, लेकिन अधिक बारिश के कारण वह भी टूट गई है। अब थोड़ी सी भी बारिश होने पर नदी में पानी भर जाता है, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है।

अधिकारी और जनप्रतिनिधि कर रहे अनदेखी 

ग्रामवासी कुंवर सिंह परते का कहना है कि किसी भी विभागीय काम या राशन लेने के लिए उन्हें मुख्य मार्ग से होते हुए पिंडरई माल जाना पड़ता है, जहां पहुंचने का कोई सुगम रास्ता नहीं है। उन्होंने मांग की है कि रैयत पिंडरई मेला मंदिर से सांगवा मुख्य मार्ग तक एक सड़क का निर्माण किया जाए, जिससे न केवल ग्रामीणों बल्कि मां नर्मदा स्थल पर जाने वाले भक्तों को भी सुविधा मिलेगी। झाम सिंह तेकाम का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण आजादी के इतने सालों बाद भी हमें पैदल चलने के लिए एक सही रास्ता नहीं मिला है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। हमें हर दिन इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।



 

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