चार महीने से नहीं मिला मध्यान्ह भोजन का भुगतान
- बच्चों को परोसा जा रहा चावल, दाल तो कभी सब्जी
- सरकार की योजनाओं पर उठ रहे सवाल
- बच्चों के विकास पर पड़ रहा प्रभाव
मंडला महावीर न्यूज 29. सरकार की स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजना मध्यान्ह भोजन अब सवालों के घेरे में नजर आ रही है। जिले में एक नहीं कई प्राथमिक शालाओं में मध्यान्ह भोजन मेन्यू चार्ट के हिसाब से नहीं बनाया जा रहा है। बच्चों के शरीरिक विकास के लिए उचित पोषण युक्त आहार देने की मंशा का क्रियान्वयन जिले की स्व सहायता समूह नहीं कर पा रही है, कारण समूह को पिछले चार माह से मध्यान्ह भोजन के लिए भुगतान नहीं मिल है। जिससे नौनिहाल मध्यान्ह भोजन में जो मिल रहा है, वहीं भोजन कर रहे है।
जानकारी अनुसार जब हमारी टीम मंडला जिले की ग्राम पंचायत खड़देवरा के अमगवां गाँव पहुंची और बच्चों को दिये जाने वाले मध्यान्ह भोजन की जानकारी ली तो पता चला कि यहां पिछले कई महिनों से बच्चों को मेन्यू चार्ट के हिसाब से भोजन नहीं खिलाया जा रहा है। प्राथमिक शालाओं में संचालित मध्यान्ह भोजन अब सवालों के घेरे में है। अमगवां के प्राथमिक शाला में पढऩे वाले 42 बच्चों को मेन्यू के हिसाब से पूरा खाना नहीं मिल रहा है। बच्चों को सिर्फ दाल-चावल तो कभी चावल के साथ सब्जी परोसी जा रही है, जबकि मेन्यू में सब्जी और अन्य पौष्टिक आहार भी शामिल हैं।
बताया गया कि जन शिक्षा केंद्र हिरदेनगर के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला अमगवां में कक्षा पहली से पांचवीं तक के 42 बच्चे दर्ज हैं। इन बच्चों के लिए माँ नर्मदा स्व सहायता समूह द्वारा मध्यान्ह भोजन का संचालन किया जा रहा है, लेकिन समूह का कहना है कि उन्हें पिछले चार महीने से भुगतान नहीं मिला है। समूह अध्यक्ष ने बताया कि वे अपने पास से पैसा लगाकर बच्चों को भोजन करा रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे बच्चों को मेन्यू के हिसाब से पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन नहीं दे पा रही हैं।
बिना भुगतान के परोस रहे भोजन
माँ नर्मदा स्व सहायता समूह अध्यक्ष बंसती सिंगरौरे ने बताया कि पदमी सोसाइटी के सेल्समैन ने जुलाई माह के राशन के लिए उनके फिंगरप्रिंट भी ले लिए थे, लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया गया। अब अगस्त का महीना भी खत्म हो चुका है, और अभी तक उस महीने का भी राशन नहीं मिला है। इस वजह से समूह के सामने बच्चों को खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्व सहायता समूह ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि वे अपने पास से पैसा लगाकर बच्चों को भोजन करा रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे लगातार बिना भुगतान के यह काम जारी रख सकें। यही नहीं, उन्हें राशन भी समय पर नहीं मिल रहा है।
सरकार की मंशा पर सवाल
बताया गया कि सोमवार को मेन्यू के अनुसार बच्चों को चावल के साथ तुअर की दाल और चना-टमाटर की सब्जी खिलानी थी। लेकिन उन्हें केवल दाल और चावल दिया गया। इस घटना से सरकार की पोषण आहार को प्राथमिकता देने की मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब समय पर भुगतान और राशन ही नहीं मिलेगा, तो स्व-सहायता समूह बच्चों को पौष्टिक भोजन कैसे दे पाएगा।
बच्चों पर पड़ रहा असर
बताया गया कि मध्यान्ह भोजन में बिना मेन्यू चार्ट के बच्चों को भोजना कराना एक गाँव की समस्या नहीं है, बल्कि यह उन सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करती है, जो सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य से जुड़ी हुई हैं। शिक्षा का अधिकार कानून और पोषण योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब जमीनी स्तर पर उनका सही क्रियान्वयन होगा। जिले के नौनिहालों को मिलने वाले पौष्टिक मध्यान्ह भोजन से वंचित किया जा रहा है, जिसका सीधा असर उनके विकास पर भी पड़ रहा है।
इनका कहना है
समूह का भुगतान ना होने से उधारी मिलने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, तीन माह का भुगतान सोमवार को भोपाल से हो गया है, आगे से मेन्यू चार्ट के हिसाब से बच्चों को भोजन दिया जाएगा।
मुकुल पटेल, एमडीएम प्रभारी, मंडला
मध्यान्ह भोजन की राशि पिछले चार महीने से समूहों के खाते में नहीं आने के कारण समूह सदस्य परेशान हो रहे थे। इसलिए मैन्यू के आधार पर भोजन दे पाने में असक्षम थे। मध्यान्ह भोजन की राशि का भुगतान प्रतिमाह एक निश्चित तारीख के पहले सरकार को करना चाहिए।
पीडी खैरवार, संरक्षक
मध्यान्ह भोजन योजना संचालक समूह मंडला












