तीन संतान वाले शिक्षकों को राहत, प्रताड़ना पर अब होगी शिकायत  

तीन संतान वाले शिक्षकों को राहत, प्रताड़ना पर अब होगी शिकायत

  • एसोसिएशन ने किया दावा, अधिकांश मामले में शिक्षक निर्दोष
  • ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की बैठक में खुलासा, ब्लैकमेलिंग के शिकार हो रहे हैं शिक्षक

मंडला महावीर न्यूज 29. ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने हाल ही में तीन से अधिक संतान वाले शिक्षकों की एक बैठक आयोजित कर बड़ा खुलासा किया है। एसोसिएशन का दावा है कि ऐसे अधिकांश शिक्षक कानूनी तौर पर निर्दोष हैं और वे बेवजह ब्लैकमेलिंग का शिकार हो रहे हैं। इस संबंध में बैठक का आयोजन ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर की अगुवाई में हुई। एसोसिएशन को लगातार शिकायत मिल रही थी कि मवई समेत कई क्षेत्रों में ऐसे शिक्षकों को कुछ व्यक्तियों के द्वारा नौकरी से बर्खास्त करा देने की धमकी और ब्लैकमेलिंग कर उनसे धन राशि ऐंठी जा रही है। जानकारी के अभाव में कुछ शिक्षक इस ब्लैकमेलिंग के शिकार हो रहे हैं। आयोजित बैठक में 50 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।

बताया गया कि 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान के जन्म से संबंधित नियमों को लेकर शिक्षकों में गलतफहमी है। डीके सिंगौर ने स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1961 जिसमें यह प्रावधान जोड़ा गया था, अध्यापक संवर्ग (शिक्षाकर्मी या गुरुजी) पर लागू नहीं होता था, क्योंकि उनकी भर्ती उस समय इन नियमों के तहत नहीं हुई थी। एसोसिएशन ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने 19 सितंबर 2022 को एक पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 26 जनवरी 2001 से पहले हुई है, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके साथ ही कोर्ट के कई मामलों का हवाला देते हुए यह भी बताया कि सेवा से बर्खास्तगी के मामले दुर्लभ हैं।

भयभीत होने की जरूरत नहीं 

बताया गया कि उच्च न्यायालय जबलपुर ने दो ऐसे मामलों में कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, और जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजनल बेंच ने वेतन वृद्धि रोकने के आदेश को भी निरस्त कर दिया था और दोनों शिक्षक अपनी ड्यूटी पर हैं। टीकमगढ़ के एक मामले में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राथमिक शिक्षक को पदोन्नति कर सहायक अध्यापक बना दिया गया था, कोर्ट की फटकार के बाद फिर से प्राथमिक शिक्षक बनाना पड़ा। बड़वानी के न्यायालयीन कर्मचारियों के मामले में निचली अदालत द्वारा 3 संतान होने पर 1 वेतन वृद्धि और 4 संतान होने पर 2 वेतन वृद्धि रोकने का आदेश पारित हुआ था, जिसे भी जबलपुर हाइकोर्ट की डिविजनल बेंच द्वारा निरस्त कर दिया गया और 14 कर्मचारियों को सिर्फ परिनिंदा शास्ति से ही अधिरोपित किया गया। 3 संतान वाले मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट नियम बनाए जाएं इसके लिए एसोसिएशन प्रयास करेगा। बैठक में वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई को भी समझाया गया कि यह मामूली कार्रवाई है इससे भी भयभीत होने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही शिक्षकों को बताया कि लगभग मामले में शिक्षक एकदम निर्दोष हैं यदि कोई उन्हें ब्लैक मेल करता है तो साक्ष्य जुटाएं जिससे उनकी सीधी शिकायत पुलिस के आला अधिकारी से की जा सके।



 

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