गौशाला में हथकरघा केंद्र ने बदलती लोगों की जीवनशैली

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

  • गौशाला में हथकरघा केंद्र ने बदलती लोगों की जीवनशैली
  • हथकरघा केन्द्र से मिला 50 से ज्यादा परिवारों को रोजगार

मंडला महावीर न्यूज 29. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मंडला के दयोदय गौशाला आमानाला में स्थापित श्रमदान हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र ने ग्रामीण जीवन में बदलाव की एक प्रेरक कहानी पेश की है। आचार्य विद्यासागर और आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद से संचालित यह केंद्र न केवल कपड़े बुन रहा है, बल्कि 50 से अधिक परिवारों को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार भी प्रदान कर रहा है।

बताया गया कि एक समय था जब आमानाला गांव कच्ची शराब के उत्पादन के लिए जाना जाता था, लेकिन इस केंद्र की स्थापना के बाद यहां के लोगों ने अपनी जीवनशैली बदल ली है। अब ग्रामीण हथकरघा चला रहे हैं, शाकाहारी जीवन अपना चुके हैं और सामाजिक चेतना का एक नया उदाहरण बन रहे हैं। यह केंद्र ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण, प्रशिक्षण काल में मानदेय और पौष्टिक भोजन जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें अपना उत्पादन कार्य शुरू करने के लिए नि:शुल्क हथकरघा भी दिया जाता है।

बताया गया कि वर्तमान में इस केंद्र में 36 हथकरघों पर काम चल रहा है, जिससे प्रत्येक परिवार औसतन 12 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहा है। यहां लहंगा, शेरवानी, साड़ी, कुर्ता, शर्ट, जैकेट, गमछा जैसे पारंपरिक और आधुनिक परिधान बनाए जा रहे हैं। इन वस्त्रों पर जरदोजी जैसे विशिष्ट हस्तशिल्प का काम भी किया जाता है, जिससे इनकी मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। पुणे, दिल्ली, मुंबई के साथ अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से भी इनके लिए ऑर्डर आ रहे हैं।

इन वस्त्रों की बिक्री के लिए केंद्र परिसर में ही एक विक्रय केंद्र भी संचालित है। इसके अलावा संस्था की वेबसाइट के माध्यम से इन उत्पादों को ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है। यह केंद्र भारत की सांस्कृतिक परंपरा, स्वावलंबन और सामाजिक सुधार का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा रहा है।



 

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