मंडला पुलिस के 45 अधिकारी एससी, एसटी प्रकरणों में हुए प्रशिक्षित
- विशेषज्ञ व्याख्याताओं ने दिया अपना मार्गदर्शन
- संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ न्याय प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का लक्ष्य
मंडला महावीर न्यूज 29. पुलिस कंट्रोल रूम में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मंडला जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से आए 45 पुलिस अधिकारियों, विवेचकों और अन्य स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यशाला का उद्घाटन न्यायाधीश राजेश कुमार रावतकर विशेष न्यायाधीश एससी, एसटी प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंडला द्वारा किया गया। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों, संविधान में उल्लिखित विशेष प्रावधानों, कानून और उनके अधिकारों के संरक्षण पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे यह अधिनियम पीडि़तों को राहत और पुनर्वास प्रदान करता है और पुलिस अधिकारियों की इसमें क्या भूमिका है।
एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में लोक अभियोजन अधिकारी एसएस ठाकुर ने प्रकरणों की विवेचना, जब्ती की प्रक्रिया एवं सावधानियां, प्रक्रियागत त्रुटियां, पंचनामा और उसके महत्व और चालान आदि के विषय में जानकारी दी। डीएसपी अजाक अर्चना आहिर ने विवेचना में संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डाला। एसडीओपी निवास पीएस वालरे ने अजाक प्रकरणों की विवेचना के व्यवहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। एसडीओपी मंडला पीयूष मिश्रा व एसडीओपी बिछिया सौरभ ने कानूनी प्रक्रिया व अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी। थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक शफीक खान ने फील्ड स्तर पर अपने अनुभव आधारित जानकारी साझा की।
कार्यशाला का समापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंडला शिव कुमार वर्मा के व्याख्यान के साथ हुआ। उन्होंने विधिक जानकारी के साथ तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के संतुलित समावेश पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे अनुसूचित जाति-जनजाति वर्गों के पीडि़तों को समय पर न्याय दिलाने में प्रभावी एवं व्यावहारिक कार्य किया जा सकेगा। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त किया गया और उन्हें प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।









