आलोन नदी की बाढ़ ने छीनी किसानों की उम्मीदें, हरे-भरे खेत हुए वीरान

आलोन नदी की बाढ़ ने छीनी किसानों की उम्मीदें, हरे-भरे खेत हुए वीरान

  • नैनपुर क्षेत्र में मक्का, धान और अरहर की फसलें तबाह, किसान बर्बादी के कगार पर

मंडला महावीर न्यूज 29. नैनपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रही अत्यधिक वर्षा और आलोन नदी में आई भीषण बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। नदी के तटीय क्षेत्रों में बोई गई मक्का, अरहर और धान की फसलें अंकुरित होने और पौधा बनने से पहले ही पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे अन्नदाताओं की उम्मीदें टूट गई हैं और वे आर्थिक संकट में घिर गए हैं।

किसानों ने हाइब्रिड बीजों पर भारी भरकम लागत लगाकर इन फसलों को बोया था, लेकिन इस बार समय से पहले आई बाढ़ ने उनकी सारी मेहनत बहा दी। लालपुर, खुर्सीपार, लूटमरा, पुतर्रा, धर्राची, पिपरिया, सालीवाड़ा, पिंडरई और नैनपुर भू-राजस्व क्षेत्र के अन्य बाढ़ प्रभावित गाँवों में विशेष रूप से मक्का की फसल का भारी नुकसान हुआ है। खेतों में बोई गई फसलें बाढ़ की चपेट में आकर बह गईं या मिट्टी के साथ मिलकर पूरी तरह बर्बाद हो गईं।

किसानों का कहना है कि फसलें नष्ट होने से उनका सब कुछ खत्म हो गया है। इस आपदा ने उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। उनके पास अब दोबारा बुवाई के लिए धन की कमी है, जिससे वे बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं। किसानों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए फसलों के नुकसान का उचित आंकलन कर शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस कठिन समय में सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके। बाढ़ के कारण मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हो गई है, जिससे भविष्य की फसलों पर भी नकारात्मक प्रभाव पडऩे की आशंका है।

इनका कहना हैं

आलोन नदी के बाढ़ से प्रभावित किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला पिछले साल भी बाढ़ से खराब फसल के लिये प्रशासन से मुआवजे की मांग किया गया था, लेकिन प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस वर्ष तो फसल उगने के पहले ही बाढ़ ने किसानों का पसीना बहा ले गया, प्रशासन यथाशीघ्र इस नुकसान का आंकलन कर उचित मुआवजा दिलवाने के लिए कार्यवाही करे।
कमलेश गोंड, गोंगपा मध्यप्रदेश



 

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