एक सिगरेट पीने से 11 मिनट की उम्र हो जाती है कम
- जिले में कोटपा एक्ट का सख्ती से किया जा रहा पालन
- थीम- बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्ताक्षेप से बचाना
आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस
मंडला महावीर न्यूज 29. प्रतिवर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक तंबाकू संकट और महामारी से होने वाली बीमारियों और मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साल 1987 में पहला विश्व तंबाकू निषेध दिवस बनाया गया। वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने संकल्प डब्ल्यूएचओ 40.38 पारित किया, जिसमें 7 अप्रैल को विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद 1988 में संकल्प डब्ल्यूएचओ 42.19 पारित किया गया, जिसमें 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया। बताया गया कि दुनिया भर में तंबाकू और इसके सेवन के घातक परिणामों के प्रति लोगों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों पर उद्योग की रणनीति को उजागर करना है।
जानकारी अनुसार भारत में लाखों लोगों की मृत्यु तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण होती है। भारत सरकार ने तम्बाकू आपदा से लोगों को बचाने के लिये सिरगेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003 बनाया गया है। तंबाकू उत्पादों का बढ़ता उपयोग लोगों की असमय मृत्यु का सबसे मुख्य कारण है। भारत में तंबाकू उत्पाद से प्रतिवर्ष 1.3 मिलियन से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो रही है। मप्र में करीब 50.2 प्रतिशत पुरूष एवं 17.3 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती है एवं 34.2 प्रतिशत वयस्क सार्वजनिक स्थानों पर अप्रत्यक्षित धूम्रपान के संपर्क में आते है। इसके साथ ही युवाओं एवं बच्चों में भी तंबाकू उत्पादों का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बन गया है।
ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे 2009 के अनुसार 13 से 15 वर्ष के 14 प्रतिशत से अधिक बच्चे तंबाकू की लत का शिकार है। इसके साथ ही कम आयु में तंबाकू का उपयोग शुरू करने पर इस आदत को छोड्ऩा बहुत ही कठिन होता है। जिससे विभिन्न असंचारी रोगों के होने की संभावना अधिक हो जाती है। इन्हीं गंभीर रोगों से बचाव के लिए मप्र वालंटरी हेल्थ एसोसिएशन पूरे मप्र में तंबाकू नियंत्रण के प्रयास कर रही है। जिससे युवा वर्ग को इस नशे की लत से बचा सके।
अच्छे परिणाम के लिए किए गए प्रयास
बताया गया कि जिले में तंबाकू रोकथाम और नियंत्रण के लिए एमपीवीएचए के द्वारा प्रयास किए गए। जिसमें क्षमता वर्धन के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, पंचायत, नगरपालिका, न्यायिक, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारीयों को विगत वर्ष प्रशिक्षित किया गया था। विगत वर्ष 5 राज्यों के लिए डब्ल्यूएचओ के सहयोग से स्वस्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के साथ मिलकर तंबाकू नियंत्रण पर राज्य और क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था। राज्य स्तरीय कार्यशालाएं, 50 जिला स्तरीय कार्यशालाएं, 150 ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण, पंचायत स्तरीय उन्मुखीकरण और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। जिससे तंबाकू के सेवन पर रोक लगाई जा सके।
40 तरह के कैंसर और 25 तरह की होती हैं बीमारियां
डॉ. रानी मरावी ने बताया गया कि भारत में तंबाकू और तंबाकू युक्त धूम्रपान की वजह से हर साल करीब 1.3 मिलियन से ज्यादा लोग असमय मौत की नींद सो जाते हैं। तंबाकू के सेवन से 40 तरह के कैंसर होते हैं और 25 तरह की बीमारियां होती हैं। धूम्रपान करने वाले से न करने वाले को ज़्यादा नुकसान होता है, क्योंकि हवा में घुलता धुआं धूम्रपान न करने वाले की श्वांस के माध्यम से उसे नुकसान पहुंचाता है। रिपोट्र्स के मुताबिक भारत में तंबाकू सेवन से पिछले 30 साल में 58.9 प्रतिशत मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। सन् 1990 में छह लाख लोगों की जान तंबाकू ने ली थी। जो वर्ष 2019 में दस लाख हो गई।
एक सिगरेट पीने से 11 मिनट की उम्र हो जाती है कम
डॉ. रानी मरावी ने बताया गया कि रिसर्च के मुताबिक 01 सिगरेट पीने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते हैं। यही वजह है कि तम्बाकू सेवन के कारण दुनिया में हर 6 सेकंड में 1 मौत होती है। लंबे समय तक तम्बाकू का सेवन शरीर को खोखला कर देता है। यह वात, पित्त और कफ तीनों को बढ़ाता है। इसके कारण कैंसर, दिल से जुड़ी बीमारियां, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, अल्सर आदि कई बीमारियां होती हैं। भारत में मुंह और गले के कैंसर का यह प्रमुख कारण है। दरअसल यह एक धीमा जहर है जो धीरे-धीरे इंसान की जिंदगी को मौत की तरफ धकेलता है।
तंबाकू के सेवन से होने वालीं बीमारियां
जिला चिकित्सालय मंडला में पदस्थ डॉ. रानी मरावी ने बताया कि धूम्रपान कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का मुख्य कारण तंबाकू का सेवन है। वहीं महिलाओं में जैसे- प्रतिकूल गर्भावस्था के परिणाम, महिला विशिष्ट कैंसर जैसे- स्तन, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर और हृदय संबंधी जोखिम में वृद्धि आदि। तंबाकू में निकोटिन होता है तो सबसे ज्यादा आपपके नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। इसे आसानी से छोडऩा काफी मुश्किल है लेकिन अगर आप खुद पर विश्वास कर लें तो हो सकता है कि आप इससे दूरी बना लें। अगर आप लगातार कोशिश कर रहे हैं कि तंबाकू का सेवन करना छोड़ दें और कर नहीं पा रहे हैं तो आप जिला चिकित्सालय मंडला के व्यसन केन्द्र में आकर संपर्क करें।
मंडला जिले में भी चल रहा प्रयास
तंबाकू नियंत्रण के लिए जबलपुर संभाग केे सभी जिलों समेत मंडला में कार्य किया जा रहा है। यहां जिला प्रशासन के सहयोग से तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जिले में तंबाकू सेवन की रोकथाम के लिए स्वयं सेवी संस्था जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे है। तंबाकू नियंत्रण के प्रयास के लिए मंडला जिले में भी सार्वजनिक स्थानों में धू्रमपान करने वालों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ स्कूलों में तंबाकू नियंत्रण के लिए अनेक कार्यक्रम किए गए। जिससे इसके प्रति युवाओं और लोगों में जागरूकता आई है। वहीं जिला चिकित्सालय में तंबाकू नियंत्रण के लगातार चालानी कार्रवाई दंत चिकित्सक रानी मरावी और गठित टीम द्वारा समय-समय पर की जाती है।
डॉ. रानी मरावी, जिला चिकित्सालय मंडला














