अनूठी पहल-शिक्षा की अलख जगा रहा कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय

अनूठी पहल- शिक्षा की अलख जगा रहा कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय

  • बच्चे कर रहे नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
  • आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे की कवायद

मंडला महावीर न्यूज 29. देश, प्रदेश में अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व अब एक नई पहचान कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय के नाम से बना रहा है। यह कान्हा नेशनल पार्क की एक अनूठी पहल है, जिसकी सराहना स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी की है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩा है। कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय में पहुंच रहे बच्चों में भी खुशी का माहौल है। छात्रा शुभा यादव ने बताया कि वन विभाग द्वारा आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए की जा रही यह सुविधा बहुत सराहनीय है। अभिभावक संतोषी धुर्वे ने भी इस पहल की सराहना की है।

जानकारी अनुसार कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय शिक्षा की अलख जगा रहा है। यह अनोखी पहल कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली भिलवानी में भी शुरू हुई है, जहां बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क तैयार किया जा रहा है। इन पुस्तकालयों में बच्चों को वे सभी आवश्यक किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, जो उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होती हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व ने इस पुस्तकालय की शुरुआत सबसे पहले समनापुर से की थी और अब इसका विस्तार हो चुका है, जिसमें 4 अतिरिक्त संस्थान भी खोले गए हैं। इन सभी स्थानों पर बच्चे साल भर नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

किताबें दान करने में ले रहे बढ़चढ़ कर हिस्सा 

बताया गया कि किसली भिलवानी में संचालित कान्हा जंगल मित्र पुस्तकालय आदिवासी क्षेत्रों के गरीब तबके के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें उपलब्ध करा रहे हैं, जो उन्हें अन्यथा नहीं मिल पातीं। ये किताबें समूह के माध्यम से एकत्र की जाती हैं और पुस्तकालय में रखी जाती हैं। लोग भी इन पुस्तकालयों को किताबें दान करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व की यह सराहनीय पहल है, जिसकी हर कोई प्रशंसा कर रहा है।

शांत और प्राकृतिक माहौल में बच्चे कर रहे अध्ययन 

कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से लगे गाँवों के बच्चों के लिए शुरू की गई ये लाइब्रेरी पार्क क्षेत्र से लगे पाँच गाँवों में फैली हुई हैं। इसका मुख्य मकसद ग्रामीण बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें उपलब्ध कराना है। बच्चे इन पुस्तकालयों में दिनभर शांत माहौल में बैठकर अध्ययन करते हैं। उन्हें यह भी छूट हासिल है कि वे चाहें तो किताबें घर ले जाकर पढ़ सकते हैं और बाद में जमा कर दूसरी किताब ले सकते हैं। हालांकि ज्यादातर बच्चे जंगल से लगे इन पुस्तकालयों में शांत और प्राकृतिक माहौल में बैठकर पढऩा पसंद करते हैं।

प्रतिस्पर्ध कर प्रतियोगी परीक्षा में सफल होंगे बच्चे 

पुस्तकालय के नियमित पाठकों का कहना है कि उन्होंने शहरी क्षेत्रों के पुस्तकालयों में भी अध्ययन किया है, लेकिन वहाँ वाहनों और दूसरे शोर-शराबे के बीच पढ़ाई में एकाग्रता नहीं बन पाती। जबकि यहाँ एकदम शांत वातावरण में अच्छी तरह से पढ़ाई की जा सकती है। पार्क प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों ने नीट जैसी परीक्षाएं भी पास की हैं। इसी को देखते हुए पार्क प्रबंधन ने सोचा कि बच्चों को नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा से लेकर पीएससी और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें उपलब्ध कराई जाएं। इसी मकसद को लेकर पुस्तकालयों का निर्माण किया गया और वहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें उपलब्ध कराई गईं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे शहरी क्षेत्र के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें।



 

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