माता के दरबार में माथा टेकने और एक चुटकी भभूत से होती मन्नत पूरी

माता के दरबार में माथा टेकने और एक चुटकी भभूत से होती मन्नत पूरी

  • भभूत खाने से मिलती है परेशानियों से निजात
  • चौगान की मढिय़ा आदिवासियों का है तीर्थ स्थान, रखे जाते हजारों की संख्या में ज्वारे व कलश

मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय मंडला से घुघरी मार्ग के बीच करीब 30 किमी दूर रामनगर के समीप स्थित चौगान में माता का दरबार आस्था का केन्द्र है। यहां दूर-दूर से हजारो श्रृद्धालु मन्नत लेकर आते है। यहां आने भक्तों के कष्ट माँ हरती है। यहां वर्ष के दोनों नवरात्र में हजारो कलश, खप्पर स्थापित किये जाते है। भक्त मन्नत पूरी होने पर मां का आर्शीवाद लेने कलश स्थापित करते है।


बताया गया है कि चौगान दरबार में मंडला के अलावा अन्य राज्यो से भी श्रद्धालु आते है। चैत्र नवरात्र पर्व में माता के दरबार में भक्तो का तांता लगा हुआ है। श्रृद्घालु नौ दिनों तक यहां निवास भी करते है। इस मढिय़ा की महिमा दूर-दूर तक है। मढिय़ा 1700 ई.सन से है। चैत्र नवरात्र में मढिय़ा में भक्तो का तांता लगा रहता है। नौ दिनो तक मढिय़ा में विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। चौगान मढिय़ा पत्थर की दीवार के परकोटे से सुरक्षित है, यहां मां का दरबार है। पंडा पूजन कर भक्तो को धूनी प्रसाद स्वरूप देते है। जिससे भक्तो के सारे मनोरथ पूरे होते है। साल भर में मढिय़ा में चार पर्व चैत्र नवरात्र, शारदेय नवरात्र, कार्तिक पूर्णिमा, शिवरात्रि मनाई जाती है।

जानकारी अनुसार चौगान की मढिय़ा आदिवासियों का तीर्थ स्थान कहा जाता है, मंडला से 30 किमी दूर इस स्थान पर नवरात्रि में विशेष पूजा अर्चना की जाती है, यहां भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, लोगों का मानना है कि इस स्थान पर आने से कई बीमारियों से निजात भी मिल जाता है। इस मढिय़ा में ना केवल मंडला जिला बल्कि दूसरे प्रदेशों व जिलों से हर वर्ग के लोग मन्नत मांगने आते है। यहां दरबार में एक चुटकी भभूत खाने और दरबार में माथा टेकने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भक्तों की मन्नत पूरी होने पर यहां भक्तों द्वारा ज्योत कलश की स्थापना कराना जरूरी होता है।

एक चुटकी भभूत से दूर होती है बीमारी, मन्नत होती है पूरी 

जानकारी अनुसार इस स्थान पर श्रृद्धा रखने वाले भक्तों का मानना है कि चौगान की मढिय़ा में देवी का वास है और लोग यहां दूर-दूर से आकर अपनी मन्नत को पूरी करने के लिए दरबार में प्रार्थना करते है। दरबार में आने के बाद श्रृद्धालु सबसे पहले नारियल, अगरबत्ती के साथ अपनी मनोकामना चौगान की मढिय़ा में स्थापित देवी से कहना पड़ता है और यहां देवी के पुजारी पंडा के सामने अपनी मन्नत की अर्जी लगाते है। इसके बाद पंडा द्वारा लगातार जलती धूनी की एक चुटकी भभूत माँ के आशीर्वाद के रूप में देते है। जिसके बाद इस भभूत को खाने के बाद बीमारियों के दूर होने और अपनी मांगी मन्नत को पूरी होने की बात पंडा कहता है। दरबार के पुजारी का कहना है कि दरबार की माता लोगों की सूनी गोद भरने के साथ बीमारियों को भी दूर करती है। मानसिक रूप से विक्षिप्त यहां दरबार में ठीक हो जाते है। इसके साथ ही यहां कानूनी उलझनों से भी दरबार से निजात मिलता है।

नवरात्र में रखे जाते है हजारों कलश 

ग्रामीण बताते है कि यहां जिस किसी की मन्नत पूरी होती है, उन्हें इस दरबार में एक बांस की टोकनी, मिट्टी का बड़ा दीपक और तेल बाती लेकर आना पड़ता है। नवरात्रि प्रारंभ के दूसरे दिन खास तरह की मिट्टी सभी को पुजारी के द्वारा बताए गए स्थान से लानी पड़ती है। जिसके बाद धान के ज्वारे टोकरी में बोए जाते है और एक साथ ज्योति प्रज्जवलित कर कलशों की स्थापना की जाती है। इस स्थान में मांगी गई मन्नत पूरी होने के बाद ही कलश रखे जाते है और यहां रखने वाले कलशों की संख्या दोनों नवरात्र में करीब तीन हजार से ज्यादा रहती है।



 

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