- शीतलहर में खानपान पर दें विशेष ध्यान-डायटिशियन रश्मि वर्मा
- गरम भोजन का करें सेवन
- फ्रिज में रखी ठंडी चीजों को खाने से बचें
मंडला महावीर न्यूज 29. शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए जिला चिकित्सालय मंडला की डायटिशियन रश्मि वर्मा ने सर्दियों में खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में सही आहार से शरीर को गर्म रखने और बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। डायटिशियन वर्मा ने बच्चों, बुजुर्गों और जवानों के लिए अलग-अलग आहार टिप्स दिए हैं।
उन्होंने बतायाकि बच्चों को ऐसी चीजें खिलाएं, जो पोषक तत्वों से भरपूर हों और शरीर को ऊर्जा प्रदान करें। इसमें घी, गुड़, सूखे मेवे और दूध शामिल करें। बुजुर्गों के लिए हल्का लेकिन पौष्टिक आहार जरूरी है। डायटिशियन ने कहा कि बुजुर्गों को सूप, खिचड़ी, दलिया और गर्म पेय जैसे अदरक वाली चाय या काढ़ा देना फायदेमंद हो सकता है। सर्दियों में हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार भी शामिल करना चाहिए।
ठंडी चीजों को खाने से बचें
युवाओं के लिए रश्मि वर्मा ने कहा कि इस मौसम में शरीर की ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार लें। मूंगफली, तिल के लड्डू, हरी सब्जियां, और मौसमी फलों का सेवन करें। साथ ही, भरपूर मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है ताकि शरीर हाइड्रेट रहे। उन्होंने यह भी कहा कि ठंड से बचने के लिए गरम भोजन का सेवन करें और फ्रिज में रखी ठंडी चीजों को खाने से बचें।
सही आहार से शीतलहर के प्रभाव से बच सकते है
खाने में मोटे अनाजों को शामिल करें जैसे की ज्वार, मक्का, रागी, बाजार इनकी तासीर गर्म होती है जो कि हमारे बॉडी के टेंपरेचर को मेंटेन रखने का काम करते हैं। इसके साथ ही इसमें फाइबर बहुत अच्छा होता है जिससे की कब्ज की शिकायत नहीं होती है। इसका ग्लिसमिक इंडेक्स भी काम होता है। अदरक, लहसुन, हल्दी और दालचीनी जैसे मसाले आहार में शामिल करें, जो शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। डायटिशियन रश्मि वर्मा ने सर्दियों में खानपान पर विशेष ध्यान देने और स्वस्थ रहने की अपील की है। उनका कहना है कि सही आहार और जीवनशैली से शीतलहर के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
शीतलहर के प्रभाव से बचने के लिये बरतें सावधानियां
मंडला महावीर न्यूज 29. शीत लहर का प्रभाव प्रत्येक वर्ष दिसंबर-जनवरी के महीनों में होता है और कभी-कभी विस्तारित शीत लहर की घटनाएं नवंबर से फरवरी तक होती है। वर्तमान में जिले में शीत लहर का प्रभाव जारी है। जिसके चलते सर्द हवाओं के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पडऩे के साथ यदाकदा मृत्यु होना भी संभावित है। शीतलहर का नकारात्मक प्रभाव वृद्धजनों एवं 5 वर्ष के छोटे बच्चों पर अधिक होता है। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजनों, बेघर व्यक्तियों, दीर्धकालिक बीमारियों से पीडि़त रोगियों, खुले क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले छोटे व्यवसायियों के लिए भी शीतलहर के दौरान विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।
शीत ऋतु में रखे सावधानी
शीत ऋतु में पर्याप्त मात्रा मेें गर्म कपड़े पहनें जैसे दस्ताने, टोपी, मफलर, एवं जूते आदि पहने। शीत लहर के समय जितना संभव हो सके घर के अंदर ही रहें और कोशिश करें कि अतिआवश्यक हो तो ही बाहर यात्रा करें। नियमित रूप से गर्म पेय पीते रहें। आवश्यकतानुसार रूम हीटर का उपयोग करें एवं रूम हीटर के प्रयोग के दौरान पर्याप्त हवा निकासी का प्रबंध रखें। शीत लहर के समय विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है, जैसे- फ्लू , सर्दी, खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षण हो जाने पर चिकित्सक से संपर्क करें। अल्प ताप अवस्था के लक्षण जैसे- सामान्य से कम शरीर का तापमान, न रूकने वाली कंपकपी, यादाश्त चले जाना, बेहोशी या मूर्छा की अवस्था का होना, जबान का लडख़डाना आदि प्रकट होने पर चिकित्सक से संपर्क कर उपचार प्राप्त करें ।













