वनग्राम घुघरी के जर्जर स्कूल में कैद 100 बच्चों का भविष्य
13 साल से 3 कमरों में लग रहीं 8 कक्षाएं
- नारायणगंज के आदिवासी बाहुल्य गांव में शिक्षा व्यवस्था बदहाल
- मुख्यमंत्री तक की गई शिकायतें, फिर भी नहीं बना स्कूल भवन
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के नारायणगंज विकासखंड अंतर्गत आने वाले सुदूर वनग्राम घुघरी में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। यहां संचालित एकीकृत माध्यमिक शाला में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 100 आदिवासी बच्चे एक वर्षों पुराने और जर्जर प्राथमिक शाला भवन में पढऩे को मजबूर हैं। बैठक व्यवस्था का आलम यह है कि इस स्कूल में केवल तीन कमरे हैं और इन्हीं तीन कमरों में 8 कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। पिछले 13 सालों से आदिवासी बच्चों की पढ़ाई इसी तरह प्रभावित हो रही है, लेकिन जिम्मेदारों ने पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं।
एक कमरे में बैठते हैं कई कक्षाओं के बच्चे
ग्रामीण मुलवा विश्वकर्मा ने स्कूल की दुर्दशा बयां करते हुए बताया कि प्राथमिक शाला का भवन वर्षों पुराना होने के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। साल 2013 में गांव में माध्यमिक शाला तो चालू कर दी गई, लेकिन उसके लिए भवन नहीं बनाया गया। तब से लेकर आज तक प्राथमिक शाला के मात्र 3 कमरों में ही कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। एक ही कमरे में कई अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जर्जर भवन की छत से बरसात के दिनों में पानी टपकता है, जिससे हादसे का डर बना रहता है।
मुख्यमंत्री तक लगाई गुहार, पर समाधान सिफर
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 13 सालों से नए स्कूल भवन की मांग कर रहे हैं। इसके लिए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक को अनगिनत बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी कई बार समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन आज तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासन की इस घोर अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश पनप रहा है।
ग्रामीणों ने की नए भवन की मांग
अपने बच्चों के भविष्य को अंधकारमय होता देख, ग्रामवासियों ने एक बार फिर जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों से तत्काल नए शाला भवन की स्वीकृति देने और उसका निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की है।









