मोहगाँव रैय्यत में नर्मदा परिक्रमावासियों को मिलेगी नि:शुल्क भोजन और आवास की सुविधा
- अतिथि देवो भव: की परंपरा साकार, कुमारी ओशीन जैन फाउंडेशन की पहल
- अपना ढाबा के सहयोग से नर्मदा भक्तों को मिलेगी निस्वार्थ सेवा
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के अंतर्गत आने वाले मोहगाँव रैय्यत में नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत ही सराहनीय और पुनीत कार्य की शुरुआत की गई है। कुमारी ओशीन जैन फाउंडेशन ने अपना ढाबा एंड रेस्टोरेंट के सहयोग से परिक्रमावासियों के लिए नि:शुल्क भोजन और आवास की व्यवस्था का संकल्प लिया है। यह पहल सेवा, करुणा और अगाध भक्ति की भावना का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।
जानकारी अनुसार माँ नर्मदा की परिक्रमा को भारत की सबसे कठिन, लेकिन प्रतिष्ठित आध्यात्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है। इस पवित्र यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु माँ नर्मदा की परिक्रमा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ आध्यात्मिक शांति एवं आत्मिक संतुष्टि की कामना करते हैं। इस लंबी यात्रा में श्रद्धालुओं को प्राय: मीलों की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है, जिसके कारण उन्हें मार्ग में कई प्रकार की शारीरिक कठिनाइयों, मौसम की मार और अन्य अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
आध्यात्मिक यात्रा में फाउंडेशन का सहयोग
बताया गया कि नर्मदा परिक्रमा करने वाले इन पदयात्री श्रद्धालुओं की इन्हीं मूलभूत आवश्यकताओं और कठिनाइयों को गहराई से समझते हुए कुमारी ओशीन जैन फाउंडेशन एवं अपना ढाबा एंड रेस्टोरेंट ने यह मानवीय कदम उठाया है। इस पहल के माध्यम से उन्हें मोहगाँव रैय्यत में नि:शुल्क पौष्टिक भोजन और आरामदायक विश्राम के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस साझा प्रयास का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना है, जिससे वे अपनी कठिन आध्यात्मिक यात्रा को अधिक सहजता, सुविधा और निश्चिंतता के साथ आगे बढ़ा सकें और उन्हें मार्ग में भोजन या आश्रय की चिंता न सताए।
परिक्रमावासियों के लिए नि:स्वार्थ सहायता की पहल
यह सेवा कार्य भारतीय सनातन संस्कृति की उन शाश्वत परंपराओं का प्रतीक है, जिनमें नि:स्वार्थ सेवा, अन्नदान और अतिथि देवो भव को विशेष और सर्वोच्च महत्व दिया गया है। बिना किसी शुल्क के इन आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराकर फाउंडेशन एवं अपना ढाबा एंड रेस्टोरेंट का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों से आने वाले श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सहायता करना है, जिससे किसी भी व्यक्ति को उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के कारण ऐसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहना पड़े। यह अनूठी पहल सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक सहभागिता के महत्व को भी प्रमुखता से रेखांकित करती है। इसके साथ ही यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उठाया गया एक बेहद सकारात्मक कदम है। इस प्रकार के सेवा कार्य समाज को यह संदेश देते हैं कि करुणा, आपसी सहयोग और नि:स्वार्थ सेवा की भावना किसी पवित्र तीर्थयात्रा पर निकले व्यक्ति के जीवन में कितना सार्थक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
प्रत्येक परिक्रमावासियों को सेवा का संकल्प
इस सेवा कार्य के माध्यम से कुमारी ओशीन जैन फाउंडेशन एवं अपना ढाबा ने मानवता, उदारता और भक्ति के उच्च मूल्यों के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को पुन: व्यक्त किया है। उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि मोहगाँव रैय्यत से होकर गुजरने वाले माँ नर्मदा के प्रत्येक परिक्रमावासी को अपनत्व, स्नेह, पूरा सम्मान और श्रेष्ठ आतिथ्य का अनुभव प्राप्त हो। इस अनूठी पहल को लेकर आयोजकों का कहना है कि माँ नर्मदा के भक्तों की सेवा केवल दान का कार्य नहीं है, बल्कि यह आस्था, मानवता और नि:स्वार्थ सेवा की भावना की सच्ची अभिव्यक्ति है।










