आस्था का केंद्र बिझौली की मढिय़ा
कल्चुरी कालीन प्रतिमा के दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु
- संतान प्राप्ति की है अटूट मान्यता
- नगरार नदी के तट पर विराजीं मां विंध्यवासिनी
- 11वीं शताब्दी की पाषाण प्रतिमाओं का संगम
- 550 जवारों से महका मंदिर
मंडला महावीर न्यूज 29. चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर समूचा निवास ब्लॉक शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है। क्षेत्र के ग्राम बिझौली में नगरार नदी के तट पर स्थित बिझौली की मढिय़ा इन दिनों हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बनी हुई है। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित इस देवस्थान पर भक्त अपनी मुरादें लेकर लंबी कतारों में लग रहे हैं।
पुरातत्व संघ के सदस्य प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि इस मंदिर परिसर में स्थापित माता विंध्यवासिनी की पाषाण मूर्ति 11वीं से 13वीं शताब्दी (कल्चुरी काल) की है। मुख्य प्रतिमा के अलावा यहां खुदाई के दौरान मिलीं सूर्य, गणेश, विष्णु और शिव जी की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं। बताया गया कि यहां मंदिर प्रांगण में मुख्य प्रतिमा के अलावा कल्चुरीकालीन अनेक मूर्तियां स्थापित हैं जो कि बिझौली ग्राम में ही मकान आदि बनाने के लिए गड्ढे किए जाने के दौरान मिली। इनको ग्रामवासियों ने मंदिर प्रांगण में लाकर स्थापित कर दी हैं। यहां राधाकृष्ण, सांई बाबा, नर्मदा माता, शिव, गणेश, सीताराम, हनुमान, शनिदेव आदि के भी सुंदर मंदिर हैं। भले ही वर्तमान में यहां भव्य मंदिर का निर्माण करा दिया गया है। यहां की देखरेख क्षेत्रीय दुर्गा समिति द्वारा की जाती है।
निसंतान दंपत्तियों की लगती है अर्जी
इस मढिय़ा की सबसे बड़ी मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर है। कहा जाता है कि यहाँ सच्ची श्रद्धा से अर्जी लगाने वाले निसंतान दंपत्तियों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि मंडला के अलावा जबलपुर, डिंडोरी, बालाघाट और सिवनी जैसे जिलों से भी लोग यहाँ मत्था टेकने पहुँचते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त चैत्र नवरात्रि में यहाँ जवारे बोते हैं।
550 जवारों की हुई स्थापना
इस वर्ष मंदिर परिसर में श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप लगभग 550 जवारे स्थापित किए गए हैं, जिनसे पूरा परिसर महक उठा है। इन जवारों का विसर्जन शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में गरिमामय ढंग से किया जाएगा।
परिक्रमा वासियों होती है सेवा
नर्मदा पथ परिक्रमा मार्ग पर स्थित होने के कारण यहाँ परिक्रमा वासियों का भी तांता लगा रहता है। क्षेत्रीय दुर्गा समिति और ग्रामीणों के सहयोग से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और परिक्रमा वासियों के लिए भोजन व रुकने की उत्तम व्यवस्था की जाती है।
रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे










