शक्ति उपासना का महापर्व
- नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन का है विशेष महत्व
- विधि-विधान से की गई आराधना दिलाती है अक्षय फल
मंडला महावीर न्यूज 29. चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की साधना और अटूट भक्ति का प्रतीक है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना विधि-विधान से करने पर भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी ने नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले विशेष अनुष्ठानों और उनके महत्व पर प्रकाश डाला है।
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों में माँ की महिमा समाहित है। उन्होंने आगे बताया कि मार्कंडेय पुराण से उद्धृत दुर्गा सप्तशती का वाचन नवरात्रि में अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसमें 700 श्लोकों के माध्यम से महाकाली, महालक्ष्मी और माँ सरस्वती की स्तुति की गई है। उन्होंने बताया कि पाठ प्रारंभ करने से पहले कवच, अर्गला और कीलक सहित छह अंगों का पाठ अनिवार्य है। इसके बाद 13 अध्यायों का विधिवत वाचन और अंत में रात्रि सूक्त व देवी सूक्त का पाठ करने से ही अनुष्ठान पूर्ण माना जाता है।
नवार्ण मंत्र है सप्तशती की आत्मा
पंडित संदीप ज्योतिषी ने जानकारी देते हुए बताया कि पाठ के आदि और अंत में 108 बार नवार्ण मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इसे सप्तशती की आत्मा कहा गया है। इसके साथ ही पाठ से पूर्व बटुक भैरव की पूजा और अखंड दीप प्रज्वलित करना शुभ फलदायी होता है। उन्होंने साधकों के लिए रात्रि 11 बजे से 3 बजे तक के समय को हवन, पूजन और मंत्र सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया।
कन्या पूजन, साक्षात् देवी का स्वरूप हैं नौ कन्याएं
नवरात्रि अनुष्ठान में कन्या पूजन को अपरिहार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करना चाहिए। इससे माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
व्रतधारियों के लिए विशेष निर्देश
पंडित संदीप ज्योतिषी ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि व्रत के दौरान दिन में केवल एक बार फलाहार करें, भूमि पर शयन करें और पूर्णत: सात्विक जीवन जीते हुए तामसिक भोजन से परहेज करें। विधि-विधान और संयम से की गई यह साधना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।









