मुंबई के 33 भक्तों ने शुरू की माँ नर्मदा की उत्तरवाहिनी परिक्रमा

चैत्र मास के साथ उत्तरवाहिनी परिक्रमा का शंखनाद

मुंबई के 33 भक्तों ने शुरू की पैदल यात्रा

  • व्यास नारायण मंदिर में संकल्प पूजन के साथ गूंजा ‘नर्मदे हर’
  • महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु

मंडला महावीर न्यूज 29.  चैत्र मास का प्रारंभ होते ही संस्कारधानी मंडला में माँ नर्मदा की सुप्रसिद्ध ‘उत्तरवाहिनी परिक्रमा’ के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ना शुरू हो गया है। विशेष रूप से महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त मंडला पहुँच रहे हैं। इसी क्रम में मुंबई से आए 33 नर्मदा भक्तों के दल ने व्यास नारायण मंदिर में विशेष संकल्प पूजन के साथ अपनी पैदल परिक्रमा का शुभारंभ किया।

परंपरागत पूजन और संकल्प

नगर के ऐतिहासिक किले घाट स्थित श्री व्यास नारायण मंदिर में पंडित रामायणी दुबे द्वारा सविधि पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। मुंबई से आए सभी 33 श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा के पावन जल से संकल्प लिया। इसके पश्चात मंदिर से जल लेकर यात्रा की शुरुआत की गई। परंपरा के अनुसार यह यात्रा जहाँ से शुरू होती है, परिक्रमा पूर्ण होने पर पुनः उसी स्थान पर जल अर्पित कर इसे समाप्त किया जाता है।

परिक्रमा का मुख्य मार्ग और पड़ाव

माँ नर्मदा महाराजपुर संगम से लेकर घाघी घाट तक ‘उत्तरवाहिनी’ (उत्तर दिशा की ओर बहने वाली) स्वरूप में प्रवाहित होती हैं। इस 21 किलोमीटर लंबे मार्ग की परिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक माना गया है। श्रद्धालुओं का दल व्यास नारायण मंदिर से प्रस्थान कर झूलापुल, रंगरेज घाट और किला घाट पहुँचा, जहाँ नाव द्वारा तट परिवर्तन कर राधाकृष्ण मंदिर (गुप्त सरस्वती) पुरवा घाट पहुँचा गया। यहाँ से बंजर नदी का तट परिवर्तन कर त्रिवेणी संगम होते हुए भक्त पैदल मार्ग पर आगे बढ़े।यह यात्रा मंगलेश्वर मंदिर, कारीकोन, मानादेई, सुरंगदेवरी और सिलपुरा होते हुए घाघी घाट पहुँचेगी। घाघी घाट पर पुनः नाव के माध्यम से तट परिवर्तन कर भक्त बबैहा की ओर बढ़ेंगे। यहाँ से वापसी का मार्ग ग्वारी, फूलसागर, आमाटोला, तिंदनी और कटरा होते हुए नगर में प्रवेश करेगा। अंत में श्रद्धालु पुनः व्यास नारायण मंदिर पहुँचकर माँ नर्मदा को जल अर्पित करेंगे, जिससे उनकी लगभग 45 किलोमीटर (आना-जाना) की यह कठिन पदयात्रा पूर्ण होगी।

बढ़ रहा है उत्तरवाहिनी परिक्रमा का आकर्षण

मंडला की उत्तरवाहिनी परिक्रमा अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। मुंबई से आए भक्तों ने बताया कि माँ नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा और उत्तरवाहिनी स्वरूप के दर्शन की अभिलाषा उन्हें यहाँ खींच लाई है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा भी बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। चैत्र मास के दौरान पूरे मार्ग पर ‘नर्मदे हर’ के जयकारों की गूँज सुनाई दे रही है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।



Leave a Comment