वन्यजीवों के बीच कान्हा पार्क का जिम्मा संभाल रही महिला वन रक्षक

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष

जंगल की ‘दुर्गा’ बनीं महिला वन रक्षक

  • कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में निभा रहीं दमदार भूमिका
  • चुनौतियों को मात देकर कान्हा के वन्यजीवों की रक्षक बनीं ये जांबाज महिलाएं

मंडला महावीर न्यूज 29. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज उन महिला वन कर्मियों का विशेष सम्मान है, जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वन्यजीवों के बीच रहकर कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए हैं। बालाघाट जिले के बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिलाएं अपनी कर्तव्यनिष्ठा और साहस से सशक्तिकरण की नई इबारत लिख रही हैं।

नेतृत्व और टीम वर्क का अनूठा उदाहरण

कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर सुश्री अमिता के.बी. (आईएफएस) के कुशल मार्गदर्शन में महिला टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। इस टीम में रेंजर सुश्री संध्या देशकर, बीट गार्ड विनीता मरावी, वनरक्षक श्रीमती सोनम झारिया तथा सुरक्षा श्रमिक श्रीमती प्रेमा यादव और श्रीमती विमला कुशरे जैसी महिलाएं शामिल हैं। ये सभी जंगल की गश्त, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और बेरियर निगरानी जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य बखूबी अंजाम दे रही हैं।

चुनौतियों के बीच अटूट संकल्प

वन्य क्षेत्र में गश्त करना सामान्य काम नहीं है, लेकिन इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और समर्पण हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। ये महिला कर्मी न केवल जंगल की रक्षा कर रही हैं, बल्कि अपनी पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी पूरी कुशलता से निर्वहन कर रही हैं।

सकारात्मक सामाजिक वातावरण का प्रतिफल

बालाघाट जिला, जहाँ लिंगानुपात (1000 पुरुषों पर 1022 महिलाएं) प्रदेश में सबसे बेहतर है, का यह सकारात्मक वातावरण यहां के कार्यक्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसका सीधा उदाहरण है।

प्रेरणा की मिसाल

ये महिलाएं आज उन सभी के लिए प्रेरणा हैं जो मानते हैं कि जंगल की सुरक्षा केवल पुरुषों का कार्य है। कान्हा की ये ‘वन रक्षक’ न केवल वन्य प्राणियों की ढाल बनी हुई हैं, बल्कि वे नारी शक्ति के उस स्वरूप को भी प्रदर्शित कर रही हैं जो हर क्षेत्र में अपना परचम लहराने को तैयार है।



Leave a Comment