बिंदु से ब्रह्मांड तक का सफर, मंडला की माटी में रजा साहब को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
- पेरिस की चकाचौंध के बाद मंडला को चुना विराम स्थल
- जन्मदिवस पर कला प्रेमियों ने चढ़ाई चादर
मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व के महानतम चित्रकारों में शुमार, पद्म विभूषण से सम्मानित मरहूम सैयद हैदर रज़ा को उनके जन्मदिवस पर मंडला की माटी ने बड़े ही सम्मान और आत्मीयता के साथ याद किया। बिंझिया स्थित कब्रिस्तान में रज़ा फाउंडेशन द्वारा आयोजित रजा स्मृति कार्यक्रम में देश भर से आए कलाकारों और स्थानीय कलाप्रेमियों ने उनकी और उनके पिता की मजार पर चादर पेश कर पुष्पांजलि अर्पित की।
रजा साहब का कलात्मक सफर मंडला के ककैया गाँव के एक प्राथमिक स्कूल से शुरू हुआ था, जहाँ उनके शिक्षक द्वारा एकाग्रता के लिए दिया गया एक बिंदु ही आगे चलकर उनकी चित्रकला का मुख्य आधार बना। पेरिस में 50 वर्ष व्यतीत करने के बावजूद मंडला के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। यही कारण था कि उनकी अंतिम इच्छानुसार उन्हें उनके पिता की कब्र के बगल में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया था।
कला और संगीत की त्रिवेणी
रजा फाउंडेशन के वरिष्ठ चित्रकार श्री अखिलेश ने बताया कि यह रज़ा साहब को श्रद्धांजलि देने का 10वां वर्ष है। इस उपलक्ष्य में मंडला में वॉटर कलर कैंप का आयोजन किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ ही टेराकोटा पेंटिंग और शाम को सरोद एवं तबला वादन के कार्यक्रमों ने जिले में एक नई सांस्कृतिक चेतना जागृत की है।
संदेश-अपनी जड़ों को न भूलें
वरिष्ठ चित्रकार मनीष पुष्कले ने रजा साहब के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, यह सौभाग्य की बात है कि रज़ा साहब ने पूरे संसार का भ्रमण करने के बाद अपने विराम स्थल के रूप में अपने उद्गम बिंदु (मंडला) को ही चुना। यह युवाओं के लिए संदेश है कि वे दुनिया में कहीं भी रहें, अपनी जड़ों को कभी न भूलें।
फ्रांस में मेमोरियल की उठी मांग
दिल्ली से आए उनके प्रशंसक प्रियदर्शी ने रजा साहब के वैश्विक योगदान को याद करते हुए इच्छा जताई कि जिस तरह भारत में उन्हें सम्मान मिला, उसी तरह फ्रॉस सरकार को भी वहां उनका एक मेमोरियल (स्मारक) बनाना चाहिए, जिससे आने वाली पीढिय़ां उनके कार्यों से प्रेरणा ले सकें। इस अवसर पर पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और कलाकार उपस्थित रहे।










