निजीकरण समाप्त कर संविलियन करने के लिए जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
- न्यूनतम 26 हजार वेतन और नियमितीकरण की मांग
- प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारी लामबंद
- संयुक्त मोर्चा ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का किया समर्थन
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों में कार्यरत लाखों आउटसोर्स, अस्थाई और अंशकालीन कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मप्र ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन भेजकर आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है।
संयुक्त मोर्चा ने अपनी मांगों में स्पष्ट किया है कि पिछले 15-20 वर्षों से कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार बंद किया जाए। संयुक्त मोर्चा ने अपनी मांगों में मांग की है कि आउटसोर्स और अस्थाई कर्मचारियों को लघु कैडर बनाकर नियमित किया जाए या सेवा निगम का गठन कर संविलियन किया जाए। न्यूनतम वेतन को पुनरीक्षित कर 26 हजार मासिक किया जाए और सभी शासकीय लाभ दिए जाएं। बिजली, बैंक और स्वास्थ्य सहित सभी विभागों में ठेका प्रथा और निजीकरण को तत्काल बंद किया जाए। उच्च शिक्षा प्राप्त आईटी विशेषज्ञों और इंजीनियरों को महज 8-10 हजार रुपये देकर महीनों तक वेतन रोकना बंद हो और सीधे विभाग से भुगतान किया जाए।
विभिन्न वर्गों की बहाली की अपील
ज्ञापन में ग्राम पंचायतों के चौकीदार, सफाई कर्मी, बैंक मित्र, स्वच्छाग्राही, जनसेवा मित्र और कोविड-19 के दौरान हटाए गए आयुष चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की तत्काल बहाली की मांग की गई है। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि 5 साल में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के कानून का पालन नहीं किया गया और आउट सोर्सिंग व्यवस्था खत्म नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का मानना है कि सरकारी विभागों का 80 प्रतिशत ठेकाकरण भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है, जिसे रोकना कर्मचारियों के भविष्य के लिए अनिवार्य है।









